संतकबीर नगर : भाद्र मास के श्रीगणेश चतुर्थी के पूर्व संध्या पर बुधवार को विघ्न विनाशक मंगल कारक आदि आराध्य देव गणपति की आराधना की गई। शहर समेत विभिन्न स्थानों पर पूजा पंडालों में तैयारियां पूरी की गई। स्थापित गणेश प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा के बाद गणपति महोत्सव का श्रीगणेश होगा। तीन से पांच दिवसीय पूजन व कार्यक्रमों को लेकर अस्थावानों में उत्साह है।

श्री गणेश चतुर्थी पर शहर के सर्व मंगला समय माताराजी मंदिर, डीघा बाईपास, सरैया बाईपास, गोला बाजार हनुमान मंदिर सहित आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर तथा ग्रामीण अंचल के विभिन्न कस्बों व बाजारों में जगह-जगह गणेश प्रतिमा की स्थापना तथा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। श्रीरामजानकी मंदिर, शिव मंदिर, हरिनारायण, हनुमान मंदिर सहित अनेक स्थान पर गणेश वंदना का भी आयोजन चल रहा है। सभी भक्तिभाव व संकल्प के साथ विविध कार्यक्रम कर रहे है। आस्थावानों ने श्री गणेशाय नम: का जाप भी किया।

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छाई गजानन की भक्ति की मस्ती

- गणपति उत्सव से समूचा माहौल भक्ति मय बन गया है। घरों व मंदिरों मे प्रतिदिन के पूजन के लिए की गई विभिन्न तैयारियां देखने को मिल रही है। भक्त श्रद्धा के साथ भजन-कीर्तन के साथ विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन में लगे हुए हैं। बड़े-बुजुर्ग, नौजवान व बच्चे सभी में गणपति बप्पा मोरया अजब सी मस्ती छाई हुई है। कैसेटों पर बज रहे भक्ति गीतों की धुन पर थिरक रहे है।

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गणपति पूजन आज

- गुरुवार को सुबह अराधना होगी। पंडालों में विधिविधान से पूजन करके प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रतिमा के पट खोले जाएंगे। इस मौके पर गणपति वंदना के साथ विविध कार्यक्रम होंगे। आयोजक मंडल के सदस्य तीन व पांच दिन के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करके व्यवस्था बनाने में जुटे हुए हैं। शहर में गोला बाजार, सुगर मिल, समय माता मंदिर परसिर, कोतवाली रोड आदि स्थानों पर पंडाल सज्जित किए गए। बालूशासन काली मंदिर में सुबह सात बजे से पूजा होगा। पूजनोत्सव 17 तक चलेगा। जंगल बेलहर में मुख्य मार्ग पर भव्य प्रतिमा स्थापित की गई।

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मंगल की प्रार्थना

सनातन धर्म में अनेक देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। पूजन-अर्चन से पूर्व ऋद्धि-सिद्धि के दाता प्रथम देव के रूप में श्रीगणेश की पूजा आवश्यक होती है। पूजन-पाठ सहित शुभ कार्य को विघ्न बाधा से परे होकर सकुशल संपन्न कराने के लिए सर्वप्रथम मंगल भगवान श्रीगणेशजी का आह्वान करने की परंपरा है।

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Posted By: Jagran