संतकबीर नगर: मगहर महोत्सव के तीसरे दिन सर्वधर्म सछ्वाव सम्मेलन हुआ। विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने धर्म के वास्तविक स्वरूप को परिभाषित किया। परोपकार एवं मानवता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए श्रद्धा, विश्वास, समानता, पवित्रता, गुरु भक्ति, पवित्रता, करुणा, विवेक को धर्म का स्त्रोत बताते हुए कबीर के बताएं सद्मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

स्वामी ओमानंद ने कहा कि वेद सभी के लिए है। सनातन धर्म के साथ सभी पंथों का मार्गदर्शन मिलता है।

सेंट थामस विद्यालय गोरखपुर में स्थित चर्च के फादर संतोष ने कहा कि कबीर साहब ने लोगों एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया। हम प्रभु को जाने प्रभु ने किसी लिए भेजा है। पं. कमलेश मिश्र ने कहा कि धर्म मिलजुल कर रहने का संदेश देता है। स्वामी माधवराम गोंडा ने कहा कि धर्म से सबकी रक्षा संभव है। योगाचार्य प्रोफेसर राजेश्वर यादव ने कहा कि संतकबीर ने भेद भाव से परे होकर मानवहित में कार्य की शिक्षा दी। मध्यप्रदेश के सुरेंद्र महाराज ने कहा कि धर्म मिलजुल करने रहने की सीख देते है। शकुंतला ने कबीर साहब की वाणी से धर्म मार्ग का अनुसरण कराया।

बस्ती की गीता देवी ने सद्कर्म को ही सच्चा धर्म बताया। नासिर अली ने कहा कि इंसानियत का पालन ही धर्म है। गायत्री परिवार के आचार्य हरिराम मिश्र ने कहा कि स्वयं का सुधार करना सबसे बड़ी सेवा व सच्चा धर्म है। संचालन डा. हरिशरणदास ने किया।

इस मौके पर सत्येंद्र श्रीवास्तव, गिरीश राय आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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