संतकबीर नगर : बुरे काम का बुरा नतीजा तो एक दिन आना ही है। इसी प्रकार की कहानी सामने आई बुधवार को देर रात खलीलाबाद में पकड़े गए असलहा तस्कर गिरोह के सदस्यों की। सभी ने पुलिस के सामने अपने शान- शौकत भरी ¨जदगी जीने के लिए रुपयों की व्यवस्था के लिए जरायम का रास्ता पकड़ने की बात कही। खास बात है कि पकड़े गए चारो आरोपियों की आयु 21 से 32 वर्ष के बीच है जो अभी कुछ बनने का पूरा समय होने के बाद भी गलत पेशे के कारण जेल की सीखचों में पहुंच गए।

गिरोह के 21 वर्षीय सरगना दीनबंधु यादव ने बताया कि बचपन से ही उसे मस्ती भरी ¨जदगी जीने की तमन्ना थी। लगभग एक वर्ष पहले बिहार से असलहे लाकर बेचने का कार्य करने वाले लोगों से उसका संपर्क हुआ तो उसने पहले एक दो बार पूरी प्रक्रिया समझने का प्रयास किया। कैरियर का कार्य करने के बाद खुद का गिरोह बनाकर उसने धनवान बनने की ठान लिया था। अपने साथ तीन अन्य को मिलाकर जरायम पेशे से जुड़ा कारोबार करने लगा। बिस्मिल्लाह ने बताया कि कार्बाइन और पिस्टल की नए अपराधी गिरोह में अधिक मांग रहती है। एक कार्बाइन पर उन्हें एक लाख रुपये तक का लाभ मिल जाता है। इसी प्रकार पिस्टल की बिक्री करके भी साठ हजार रुपये मिलते थे। मिलने वाले धन से सभी मंहगे होटलों में रहकर अय्याशी करने का कार्य करते थे। इन्हें असलहे देने वाला मुख्य सरगना बिहार का रहने वाला है जिसके माध्यम से हर प्रकार के असलहे पहले से मांग करने पर उपलब्ध करवाए जाते थे। उनका गिरोह प्रदेश के अनेक स्थानों पर सधे लोगों के सहयोग से कारोबार करता है। पहली बार सभी पुलिस की पकड़ में आए हैं इसके पहले कई बार डील पर आपूर्ति करके मोटी रकम कमा चुके हैं। देखने पर चेहरे से मासूम दिखने वाले युवकों ने गलत पेशा अख्तियार कर अपनी गलत भावनाओं को कुछ दिन तो पूरा किया परंतु शायद उन्हें नहीं पता था कि इसका परिणाम एक दिन उनके लिए बुरा सामने आएगा। अभी इस मामले में पुलिस के हाथ और भी बड़े कारोबारियों के चढ़ने की भी पूरी संभावनाएं हैं।

Posted By: Jagran