संतकबीर नगर: अमरडोभा स्थित मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्न तनवीरुल इस्लाम के प्रिसिपल मौलाना मुकर्रम खान की निजामत में मंगलवार की रात जलसा-ए-दस्तारे फजीलत व उर्से मुफ्कर्रे मिल्लत का आयोजन किया गया। इस मौके पर हिफ्ज के बच्चों की दस्तार के साथ ही मदरसे से शिक्षा ग्रहण कर चुके तलबा को सनद दी गई। जलसे को खिताब करते हुए फैजाबाद से आए शहजाद-ए-मुफ्कर्रे मिल्लत हजरत उल्लामा मुख्तारुल हसन बगदादी ने कहा कि अल्लाह की मुकद्दस किताब कुरान को अपने दिल में बसाना एक मुसलमान के लिये बड़े शर्फ की बात है। इस्लाम मे इल्म का हासिल करना अहम फरीजा है। इल्म ऐसी दौलत है कि जो कभी खत्म नहीं होती। इस्लाम इंसानियत का रास्ता बताता है।

हजरत अल्लामा खुर्शीदुल इश्लाम किछौछवी ने इस्लाहे मुआशरा पर खिताब करते हुए कहा कि इस्लाम अमन का पैगाम देता है। प्रिसिपल मौलाना मुकर्रम खान ने जलसे को खिताब करते हुए कहा कि ईमान वालों की शान यही है कि वह अल्लाह से सबसे ज्यादा मोहब्बत करें। उन्होंने मदरसे के नाजिम व तमाम उस्तादों की मेहनत को सराहा। महफिल नारे तकदीर अल्लाह हु अकबर के नारों से गूंजता रहा।

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84 बच्चों को की गई दस्तारबंदी

बखिरा : प्रोग्राम में 84 बच्चों को दस्तारबंदी की गई। फजिलत में 15, अलिमियत मे 32, केरात में 13 को एवं हिब्ज में 24 छात्रों को दस्तार दी गई। दस्तारबंदी से नवाजे गए छात्रों की आंखें भर आई। इस मौके पर हजरत पीरे तरीकत शैयद अब्दुल रब उर्फ चाद बाबू बेलहरी सरीफ, मौलाना मोहम्मद मोहसिन साहब निजामी, सबिक शैखुल हदीस, मौलाना आमीन अहमद, मौलाना इमाम अली, मौलाना शब्बीर अहमद, मौलाना हबीबुर्रहमान, मौलाना रहीमुद्दीन यार अलबी, सेराज अहमद समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

Posted By: Jagran