संतकबीर नगर: देव प्रबोधनी एकादशी पर श्रद्धालुओं द्वारा शुक्रवार को व्रत रख कर भगवान श्रीहरि नारायण यानी विष्णु की भक्तिभाव से विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना की जाएगी। गुरुवार को आस्थावानों ने पर्व के मद्देनजर शहर के साथ जनपद के विभिन्न बाजारों में सजी दुकानों पर व्रत में प्रयुक्त होने वाले सामग्री की खरीदारी की।

चतुर्मास के समापन पर शादी-विवाह आदि शुभ कार्यों का श्रीगणेश होगा। घरों में दीप जलाकर आंगन में चावल की रंगोली सजाने के साथ भगवान विष्णु का प्रतीक चिह्न बनाकर उसमें गन्ना, सिघाड़ा, गंजी आदि रखकर भगवान का आह्वान कर समृद्धि की कामना की जाएगी। गन्ने की फसल को काटकर उत्पादन के साथ सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य रक्षा, धन, वैभव, यश, कीर्ति में वृद्धि की मंगलकामना की जाएगी।

ज्योतिषाचार्य सुजीत श्रीवास्तव ने कहा कि देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि पताललोक में शयन करके चार माह बाद देवोत्थान एकादशी पर जगते हैं। देव उठावनी यानि उत्थान एकादशी के नाम से जाना जाता है। अब शुभ कार्यों का सिलसिला प्रारंभ हो जाएगा। सात्विकता से व्रत व पूजन करने पर मानव यश व पुण्य का भागी बनता है।

गायत्री शक्तिपीठ के आचार्य रमेशचंद्र दूबे ने कहा कि देवोत्थान एकादशी का व्रत रहने से वर्ष भर के एकादशी का फल प्राप्त होता है। चतुर्मास के समापन पर दरिद्र नारायण को घर बेघर करके दीप जलाकर प्रभु का गुणगान करना फलदायी है।

Posted By: Jagran

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