संतकबीर नगर: होली पर्व में खोवा की मांग अधिक रहती है। ग्राहकों की मांग को देखते ही बाजारों में असली की जगह नकली खोवा भी भरपूर मात्रा में भंडारण कर लिया जाता है। इसे शुद्ध खोवा बताकर प्रति किलो चार सौ रुपये में बेच दिया जाता है। एक-दो दिन में मिलावटी खोवे की बिक्री से लाखों रुपये की कमाई कर ली जाती है। शुद्धता की परख से अनजान उपभोक्ता ठगी के शिकार हो जाते हैं, मिलावटी खोवे से बनने वाले गुझिया व अन्य खाद्य सामग्री से सेहत पर खतरा रहता है।

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यदि मलने पर देशी घी जैसी महक आए तो वह शुद्ध है

अभिहित अधिकारी(डीओ)मंजूषा सिंह ने बताया कि उपभोक्ता दुकान पर खरीदने के पहले थोड़ा सा खोवा हथेली में रखकर उसे मलें। मलने पर यदि देशी घी जैसी महक आए तो यह समझें कि वह शुद्ध खोवा है। इसके अलावा एक बुंद टींचर आयोडीन डालने पर यदि खोवा का रंग नीला हो जाए तो यह समझें कि वह मिलावटी है, इसमें शकरकंद, आलू या फिर स्टार्च मिलाया गया है। ऐसा करके उपभोक्ता शुद्ध और मिलावटी खोवे की पहचान कर सकते हैं।

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मिलावटी खोवे से गुर्दा, दिल को खतरा

वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. एके शर्मा ने कहाकि मिलावटी खोवा या अन्य खाद्य वस्तु से सेहत को खतरा बना रहता है, बच्चों पर इसका कुप्रभाव ज्यादा पड़ता है। गुर्दा, दिल, पाचन क्रिया के अलावा श्वसन प्रणाली प्रभावित होती है। इसलिए हमेशा गुणवत्तायुक्त शुद्ध खाद्य वस्तु का ही सेवन करना चाहिए। खाद्य वस्तु की खरीदारी में सावधानी बरतनी चाहिए।

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