सम्भल, जेएनएन। मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के व्रत से जीवन में पाप और भाग का नाश होता है। शिवरात्रि हर महीने चतुर्दशी तिथि को पड़ती है लेकिन फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी महाशिवरात्रि कहते हैं। महाशिवरात्रि के दिन शिव के भक्त कांवड़ से गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। महाशिवरात्रि का व्रत महिलाओं के लिए खास महत्व का माना गया है। पातालेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी जुगल किशोर मिश्रा ने बताया कि मान्यता है कि अविवाहित कन्या विधि पूर्वक इस व्रत को रखे तो उनकी शादी शीघ्र ही हो जाती है। वहीं विवाहित महिलाएं अपने सुखद वैवाहिक जीवन के लिए भी इस व्रत को धारण करती हैं। महाशिवरात्रि के विषय में धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस दिन शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। इस वर्ष महाशिवरात्रि 21 फरवरी, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी।

महाशिवरात्रि का महत्व 

ईशान संहिता के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन ज्योतिर्लिंग के रूप में शिव प्रकट हुए थे। इसलिए इस पर्व को महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं। कहते हैं कि महाशिवरात्रि के व्रत से जीवन में पाप और भाग का नाश होता है। इसलिए इस व्रत को व्रतों का राजा कहा गया है।

महाशिवरात्रि पर क्या करना चाहिए 

महाशिवरात्रि भगवान शंकर का सबसे अच्छा दिन माना गया है। इसलिए इस दिन भगवान शिव की विधिवत पूजा करनी चाहिए। शिव-पूजन के लिए किसी शुद्ध पात्र (बर्तन) में जल भर कर उसमें गाय का दूध, बेलपत्र, धतूरे, अक्षत डालकर शिव ङ्क्षलग पर चढ़ाएं। इसके अलावा महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को दूध या गंगाजल से अभिषेक करना बहुत शुभ माना गया है।

महाशिवरात्रि के लिए शुभ मुहूर्त

चतुर्दशी तिथि आरंभ- शाम 5 बजकर 20 मिनट पर (21 फरवरी)

चतुर्दशी तिथि समाप्त- शाम 07 बजकर 02 मिनट पर (22 फरवरी)

शिव पूजा में ध्यान रखें ये बातें

महाशिवरात्रि पर शिव की पूजा में विशेष सावधानी रखी जाती है। शिव पूजन के समय शिवङ्क्षलग पर भस्म चढ़ाना शुभ माना गया है। शिव को बेल पत्र बहुत प्रिय होता है। इसलिए शिव जी को बेल का पत्ता (बिल्व पत्र) अवश्य अर्पण करना चाहिए। इसके अलावा शिव-पूजन में धतूरा का इस्तेमाल भी करना चाहिए।

 

Posted By: Narendra Kumar

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