चन्दौसी : पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध मेला गणेश चौथ सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। मेले में चारों धर्मों के लोग बढ़चढ़ कर भागीदारी करते हैं और देश वासियों को सांप्रदायिक एकता का संदेश देते हैं।

गणेश मेला परिषद की ओर से मेला गणेश चौथ सन 1962 से आयोजित किया जा रहा है। हर साल गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले चारों धर्मों के प्रतिनिधि फीता काट कर मेले का आगाज करते हैं। खास बात यह है कि गणेश चतुर्थी पर कौमी एकता संगठन की ओर से गणेश के मुख्य मंदिर पर बूंदी के लड्डू का भोग लगाया जाता है और पोशाक चढ़ाई जाती है जिसमें सभी धर्मों के लोगों की भागीदारी रहती है। ठेले पर लड्डू और पोशाक रख कर गाजे बाजे के साथ भजन कीर्तन करते हुए वे गणेश मंदिर पहुंचते हैं। इतना ही नहीं मेला परिसर से सटी अर्श उल्ला खानबाबा की मजार पर चादरपोशी भी की जाती है। सभी धर्म के लोग गणेश मंदिर से चादर लेकर गाजे बाजे के साथ मजार पर पहुंचते हैं और चादरपोशी करते हैं। इतना ही नहीं रथयात्रा के लिए झांकी बनाने से लेकर मेले की व्यवस्थाओं में भी सभी की भागीदारी रहती है।

गणेश मेला परिषद के मुख्य सचिव कमलेश चौधरी का कहना है कि मेला गणेश चौथ सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है। परिषद के सदस्य मनोज कुमार मीनू ने बताया कि मेला गणेश चौथ का उद्देश्य आपसी सौहार्द का संदेश देना है, शुरुआत से ही सभी धर्म के लोग मेले में सहभागिता निभाते हैं। मेला व्यवस्थापक ललित किशोर गुप्ता मेले का उद्देश्य देश भर में आपसी सौहार्द बनाए रखने का संदेश देना है, यहां सभी त्योहारों में सभी धर्मों के लोगों की भागीदारी रहती है, त्योहार चाहें किसी भी धर्म का हो, कभी कोई विवाद भी नहीं हुआ। मेला प्रबंधक र¨वद्र कुमार रूपी ने बताया कि मेले का उद्देश्य ऐसे देश का निर्माण करना है, जिसमें सभी धर्म, जाति, वर्ग के लोग भारतीय संस्कृति के अनुरुप देश का निर्माण करें।

मेला सदस्य लाल मोहम्मद शास्त्री ने बताया कि उनकी कौमी एकता हर वर्ष गणेश चतुर्थी पर गणेश बाबा को पोशाक और बूंदी का लड्डू अर्पण करती है, इस बार भी गाजे बाजे के साथ फव्वारा चौक से ठेले पर पोशाक के साथ पांच कुंतल बूंदी का लड्डू भजन कीर्तन करते हुए गणेश मंदिर पहुंच कर गणेश बाबा को अर्पण किया जाएगा, मेला का उद्देश्य देश में शांति, अमन व भाइचारे का पैगाम देना है। परिषद के उपाध्यक्ष हाजी निजामुद्दीन पूर्व प्रधानाचार्य ने बताया कि वह शुरुआत से ही मेला में भागीदारी कर रहे हैं। यहां किसी भी जाति धर्म में कोई भेदभाव नहीं है। परिषद के सदस्य इश्त्याक बेग ने बताया कि खानबाबा की मजार पर चादरपोशी किया जाना एक अच्छा संदेश है।

Posted By: Jagran