संभल में सपा का मास्टरस्ट्रोक: क्या पुराना चेहरा या 'छिपा रुस्तम' बनेगा उम्मीदवार, गेम प्लान की अंदरूनी कहानी
सपा चंदौसी सीट पर अपने उम्मीदवार के चयन को लेकर गहन मंथन कर रही है, जहां पूर्व विधायक लक्ष्मी गौतम और सतीश प्रेमी अब बिसौली का रुख कर चुके हैं।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव।
HighLights
सपा ने चंदौसी सीट पर करीब तीन दशकों में दो बार जीत हासिल की।
लक्ष्मी गौतम और सतीश प्रेमी अब बदायूं की बिसौली सीट पर दावेदार।
विमलेश कुमारी प्रबल दावेदार, 'छिपे रुस्तम' पर भी सपा की नजर।
सौरभ सक्सेना, चंदौसी। चंदौसी सीट पर सपा करीब तीन दशकों में केवल दो ही बार अपने विधायक बनवा सकी है। 2012 में सपा से जीत चुकी लक्ष्मी गौतम अब बदायूं का रुख कर चुकी हैं तो 2002 में भाजपा से मात्र 700 वोटों से हारने वाले सतीश प्रेमी भी बिसौली सीट से दावेदार हैं।
इस बार सपा से सबसे प्रबल दावेदार के रूप में विमलेश कुमारी का नाम है। हालांकि एक पूर्व जनप्रतिनिधि का नाम भी अंदरखाने चर्चा में है जो फिलहाल दूसरी पार्टी में रहकर सपा में भी अपनी पैठ गहरी कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार सपा ऐन मौके पर इस ''छिपे रुस्तम'' पर भी दांव खेल सकती है।चंदौसी से 1993 में करनसिंह सपा के टिकट से जीते थे। दूसरे नंबर पर भाजपा की गुलाबदेवी रही थीं।
सपा को दूसरी जीत 2012 में मिली, जब गुलाब देवी को हराकर लक्ष्मी गौतम विधायक बनीं। जीत के वाबजूद पति से विवाद तथा कुछ अन्य कारणों से चर्चा में आईं लक्ष्मी गौतम का टिकट सपा ने 2017 में काट दिया था तो 2022 में में भी उन्हें टिकट नहीं दिया गया।
बदायूं की बिसौली तहसील में मायका होने के कारण इस बार उन्होंने अपना रुख उधर कर लिया। हालांकि इसके पीछे वह सपा के प्रति अपनी निष्ठा तथा हाईकमान के इशारे को बता रही हैं।
इधर 2002 में गुलाब देवी से केवल 700 वोटों और 2007 में बसपा के गिरीश चंद्र से 7282 वोटों से हारने वाले सतीश प्रेमी ने भी बिसौली की ओर रुख कर लिया है। ऐसे में सपा की प्रमुख दावेदार के रूप में विमलेश का ही नाम है। विमलेश ने 2022 का चुनाव सपा के टिकट पर लड़ा था। 2017 के चुनाव में वह सपा और कांग्रेस गठबंधन की प्रत्याशी थीं। दोनों ही बार वह उपविजेता रही थीं।
| वर्ष | उम्मीदवार का नाम | परिणाम |
|---|---|---|
| 1993 | करन सिंह | जीत (विजेता) |
| 2002 | सतीश प्रेमी | उपविजेता |
| 2007 | सतीश प्रेमी | उपविजेता |
| 2012 | लक्ष्मी गौतम | जीत (विजेता) |
| 2017 | विमलेश कुमारी | उपविजेता |
| 2022 | विमलेश कुमारी | उपविजेता |
बिसौली के सपा विधायक आशुतोष मौर्य के भाजपाई होने के बाद पार्टी के निर्देश पर काम कर रही हूं। मैं बिसौली तहसील की रहने वाली हूं और कई सालों से जनता के बीच रहकर उसकी ही मांग पर तैयारी कर रही हूं। टिकट मिलेगा तो मजबूती से लड़ूंगी। -लक्ष्मी गौतम।
साल 2012 में कांग्रेस के गठबंधन से चुनाव लड़ा था लेकिन सपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता सामंजस्य नहीं बैठा पाए। 2022 के चुनाव में टिकट देर से मिलने के कारण ज्यादा वक्त नहीं मिल पाया। इस बार टिकट मिलता है तो पूरी दम से चुनाव लड़ूंगी। -विमलेश कुमारी।
शिवपाल सिंह यादव मेरे राजनीतिक गुरु हैं। उनके बेटे आदित्य यादव बदायूं से सांसद हैं तो अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए इस बार बिसौली को अपनी कर्मभूमि बनाया है। वहां के विधायक आशुतोष के भाजपा में जाने के बाद एक चुनौती के रूप में भी इसे स्वीकार किया है। टिकट मिला तो बिसौली की जनता की सेवा करेंगे। -सतीश प्रेमी।
