लकी ड्राॅ में बाइक व पैसे दोगुने का झांसा देकर 300 लोगों से ठगी, 36 हजार लौटाने के आदेश पर भी नहीं माना, अब जेल
संभल में 'नसीब अपना अपना' लकी ड्रा योजना के संचालक जितेंद्र कुमार को ग्रामीणों से बाइक और पैसे दोगुने करने ...और पढ़ें

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HighLights
36 हजार रुपये ब्याज सहित और 15 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आयोग ने दिया था आदेश, गैर जमानती वारंट पर गिरफ्तारी
संवाद सहयोगी, संभल। लकी ड्राॅ में बाइक और पैसे दोगुणे करने का झांसा देकर ग्रामीणों से रुपये ठगने का मामला सामने आया है। इस मामले में एक पीड़ित ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया तो संचालक को रुपये लौटाने का आदेश हुआ, लेकिन उसने इसकी भी अनदेखी कर दी।
आखिरकार आयोग के आदेश का पालन नहीं करने पर जारी गैर जमानती वारंट के आधार पर बनियाठेर पुलिस ने लकी ड्राॅ के आरोपित संचालक जितेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया था। अब इस मामले में आज गुरुवार को बहजोई उपभोक्ता आयोग में सुनवाई है।
मामला चंदौसी तहसील के गांव मंझावली का है। गांव निवासी जितेंद्र कुमार ने वर्ष 2017 में ''नसीब अपना अपना न्यू सैनी लकी ड्रा'' नाम से बचत योजना शुरू की थी।
योजना के तहत 300 सदस्य बनाने और 40 माह पूरे होने पर प्रत्येक सदस्य को बाइक और जमा पैसे के दोगुणा देने का वादा किया गया था। इसमें यह भी शर्त थी कि जो व्यक्ति बाइक नहीं लेगा, उसे 80 हजार रुपये दिए जाएंगे।
सदस्यों से पहली किस्त के रूप में 1100 रुपये और इसके बाद 39 माह तक एक-एक हजार रुपये प्रतिमाह जमा कराए गए थे। गांव निवासी कामेश उर्फ भूरे गिरी ने भी योजना में 39,100 रुपये जमा किए थे।
आरोप है कि संचालक ने कार्यालय बंद कर दिया और जमा रकम लौटाए बिना गायब हो गया। रुपये वापस मांगने पर गाली-गलौज और धमकी देने का भी आरोप लगाया गया।
इसके बाद कामेश ने अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में 25 जुलाई 2022 को परिवाद दायर किया। आयोग ने 14 जून 2023 को संचालक को दो माह के भीतर कामेश के 36 हजार रुपये नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।
साथ ही 15 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। इस पर आयोग ने गैर जमानती वारंट जारी किए, फिर पुलिस ने संचालक को गिरफ्तार कर 19 अगस्त 2026 को आयोग के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
अधिवक्ता देवेंद्र वार्ष्णेय के मुताबिक संचालक करीब डेढ़ माह से जेल में बंद है। उसने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। याचिका में पिता के नाम को लेकर आपत्ति जताई गई है।
अधिवक्ता के अनुसार, मामले में आयोग में गुरुवार को सुनवाई होनी है। खास बात यह है कि इस मामले में सदस्य बनाए गए 300 लोगों के साथ इसी तरह ठगी करने की आशंका है।
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