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फिर मंडरा रहा हादसे का खतरा! बारूद के ढेर पर सुरक्षा ताक पर रखकर काम कर रहीं महिलाएं

Published: Fri, 23 Oct 2026 05:10 AM (IST)

गुन्नौर में पिछले हादसे के बावजूद, दीपावली से पहले महिलाएं खुले बारूद के बीच बिना सुरक्षा उपकरणों के पटाखे बना ...और पढ़ें

गुन्नौर में आतिशबाजी तैयार करती महिला। जागरण

गुन्नौर में आतिशबाजी तैयार करती महिला। जागरण

HighLights

  1. खुले बर्तनों में रखे बारूदी मिश्रण के बीच काम कर रहीं महिलाएं, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल

राजीव कुमार, गुन्नौर (संभल)। चार जानें गईं, मकान मलबे में तब्दील हुआ और धमाके की गूंज दूर तक सुनाई दी। 13 जून 2023 को गुन्नौर के मुहल्ला सराय में उस हृयविदारक घटना ने पटाखा निर्माण में सुरक्षा की अनदेखी का भयावह चेहरा सामने रखा था। लेकिन, दीपावली करीब आते ही गुन्नौर में बारूद के बीच काम करती महिलाओं की तस्वीरें फिर चिंता बढ़ा रही हैं।

किसी के हाथों में ग्लव्स नहीं, किसी के चेहरे पर मास्क नहीं। खुले बर्तनों में रखे मिश्रण के बीच महिलाएं पटाखों में सामग्री भरने में जुटी हैं। दूसरी ओर, सुरक्षा इंतजामों के दावे किए जा रहे हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जिम्मेदारों ने पिछले हादसे से कोई सबक लिया, या फिर किसी और बड़े हादसे का इंतजार है? आतिशबाज मंजूर अली ने बताया कि उनके पास पटाखे बनाने का लाइसेंस है।

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अब तक 10 हजार छोटे और चार हजार डेढ़ इंच आकार के पटाखे तैयार किए जा चुके हैं। वहीं, मोहम्मद नईम ने बताया कि उन्होंने 20 हजार तिकोना, पांच हजार छोटे और तीन हजार नलकी पटाखे तैयार किए हैं।

निर्माण स्थलों पर आग से बचाव के लिए अग्निशमन यंत्र, पानी से भरे ड्रम और बालू की व्यवस्था की गई है। हालांकि, पटाखे बनाने में जुटी महिलाओं के हाथों में ग्लव्स नहीं होने का सवाल किया तो बोले, बारूद का मिश्रण तैयार करते समय वह स्वयं ग्लव्स पहनते हैं। मजदूरों को मिश्रण तैयार करने का काम नहीं दिया जाता, बल्कि उनसे पटाखों पर कागज लपेटने का काम कराया जाता है।

लापरवाही पर कैंसर जैसी बीमारी भी पैदा कर सकता यह कार्य : डा. प्रशांत वार्ष्णेय

फिजीशियन डाॅ. प्रशांत वार्ष्णेय ने बताया कि आतिशबाजी बनाने के दौरान इस्तेमाल होने वाले पोटैशियम नाइट्रेट, गंधक, चारकोल और कुछ केमिकल पाउडर के संपर्क में आने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

 पटाखा सुरक्षा_ सावधानी और सुरक्षा gear

इनकी धूल सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचने से खांसी, सांस लेने में परेशानी और श्वसन तंत्र में सूजन हो सकती है। साथ ही यह कैंसर जैसी बीमारी भी पैदा कर सकते हैं।

वहीं त्वचा में जलन और एलर्जी होने के साथ आंखों में भी परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक संपर्क स्वास्थ्य के लिए अधिक नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए बीच बीच में थोड़ा खुली हवा में जाते रहें। बचाव के लिए मास्क, दस्ताने और चश्मा पहनना चाहिए।

 

जिले में आतिशबाजी के 22 लाइसेंस हैं। जिसमें आठ पर निर्माण और भंडारण की अनुमति है। आठ पर ही बिक्री करने का लाइसेंस है। चार लाइसें निष्क्रिय हैं और दो नवीनीकरण की प्रक्रिया है। बाकी आतिशबाजी के ठिकानों पर चेकिंग नियमित किया जा रहा है। जहां, लापरवाही मिलेगी, वहां पर कार्रवाई होगी।


- शनद पटेन, अग्निशमन अधिकारी, संभल


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