32 दिन, 2 मौतें और गायब मोबाइल: बहजोई में मां-बेटे की मौत का रहस्य, आखिर क्यों दर्ज नहीं हुई FIR?
बहजोई में मां-बेटे की मौत को 32 दिन बीत चुके हैं, लेकिन रहस्य अभी भी बरकरार है और पुलिस ने ...और पढ़ें

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HighLights
मां-बेटे की मौत की गुत्थी अब भी अनसुलझी, आखिर कहां अटकी जांच और किसने छिपाए फोन, कैसे उठेगा रहस्य से पर्दा
संवाद सहयोगी, बहजोई (संभल)। संभल रोड पर भवन गांव के निकट 11 सितंबर की सुबह ई-रिक्शा के नीचे मां-बेटे के शव मिलने की घटना को 32 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मौत की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ सकी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल की सीडीआर और संबंधित लोगों के बयान की जांच कर रही है, मगर न हत्या की प्राथमिकी दर्ज हुआ और न सड़क हादसे की।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब दो लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई तो अब तक प्राथमिकी दर्ज न होने का आधार क्या है? जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि राकेश की पत्नी, बहन और भांजे ने उसके बड़े भाई और भतीजे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पुलिस का दावा है कि जांच में हत्या की पुष्टि करने वाला कोई साक्ष्य नहीं मिला। पुलिस सूत्रों की मानें तो सीडीआर में इस घटना से जुड़े तथ्य सामने आए, लेकिन इन तथ्यों पर आगे क्या जांच हुई और उनसे क्या निष्कर्ष निकला, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
सबसे गंभीर सवाल दोनों मृतकों के मोबाइल फोन को लेकर है। जब मोबाइल अब तक बरामद नहीं हुए तो उनकी स्थिति और उनसे जुड़े साक्ष्यों की जांच किस आधार पर आगे बढ़ रही है? दोनों फोन कहां गए, किसके पास हैं?
क्या किसी ने उन्हें जानबूझकर छिपाया? क्या मोबाइल में घटना से जुड़ा कोई अहम सुराग था, जिसकी जानकारी सामने आना बाकी है? मामले की प्रारंभिक जांच अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिणी मनोज कुमार रावत भी कर रहे हैं।
मंगलवार को राकेश की पत्नी होने का दावा करने वाली महिला विमला देवी कुछ लोगों के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची थी, लेकिन अधिकारियों से मुलाकात नहीं होने के चलते उसे अगले दिन बुलाया गया है।
बेशक पुलिस घटना को हादसा मान रही है, लेकिन हादसा कैसे हुआ, इसकी पूरी तस्वीर अब भी सामने नहीं आई है। एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि साक्ष्यों, बयानों और अन्य तथ्यों की जांच में हत्या का कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। जांच में घटना हादसा प्रतीत हुई, फिर भी जांच चल रही है।
