कौन है मुल्ला अफरोज? शारिक साठा का करीबी, लग्जरी वाहन चोरी से लेकर संभल हिंसा में 4 हत्याओं तक आरोप
संभल हिंसा में चार हत्याओं के आरोपी मुल्ला अफरोज का आपराधिक इतिहास लग्जरी वाहन चोरी और हथियारों की सप्लाई से जुड़ा है।

मुल्ला अफरोज पर लगे एनएसए को सुप्रीम कोर्ट ने रद कर दिया। (तस्वीर- फाइल)
HighLights
मुल्ला अफरोज संभल हिंसा में चार हत्याओं का आरोपी है।
सुप्रीम कोर्ट ने उसकी एनएसए हिरासत रद्द कर दी।
यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
सौरभ प्रजापति, संभल। जामा मस्जिद के सर्वे के विरोध में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा में चार लोगों की हत्या के मामले में आरोपित मुल्ला अफरोज का आपराधिक इतिहास लंबा रहा है। वह कुख्यात अपराधी शारिक साठा का करीबी है।
अफरोज दिल्ली-एनसीआर से लग्जरी वाहनों की चोरी कर उन्हें पश्चिम बंगाल, असम और नेपाल तक पहुंचाता था। साठा के निर्देश पर चोरी के वाहनों के साथ हथियारों की सप्लाई में भी उसकी भूमिका बताई गई थी।
हिंसा के बाद हुई जांच में अफरोज के खिलाफ चार हत्या और दो हिंसा से जुड़े मुकदमे दर्ज किए गए। पुलिस ने उसे 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। 19 जनवरी जेल भेज दिया है।
इसके साथ हिंसा के नौ आरोपित भी गिरफ्तार किए गए थे। पुलिस के मुताबिक, उसके कब्जे से 32 बोर की पिस्टल, तीन कारतूस और 15 खोखे बरामद हुए थे। गिरफ्तारी के बाद से वह जेल में निरुद्ध है।
प्रॉपर्टी डीलिंग से अपराध के नेटवर्क तक
मुल्ला अफरोज पहले प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था। बाद में वह शारिक साठा के नेटवर्क से जुड़ गया। वर्ष 2012 से दुबई में रह रहे साठा से वह मोबाइल एप के माध्यम से संपर्क में था।

पुलिस पूछताछ में अफरोज ने हिंसा के पीछे साठा की साजिश से जुड़ी जानकारी दिए जाने का दावा किया था। जांच में साठा के नेटवर्क से हिंसा के दौरान विदेशी हथियार उपलब्ध कराए जाने की बात भी सामने आई थी।
2024 में हुई थी संभल हिंसा
24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद में सर्वे के विरोध में संभल में हिंसा भड़क गई थी। इसमें चार लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि 30 से अधिक पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए थे। मामले में 37 लोगों को नामजद करते हुए करीब 3,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ सात मुकदमे दर्ज किए गए थे।

2025 में पुलिस ने दाखिल किया था आरोपपत्र
अफरोज के खिलाफ दर्ज छह मुकदमों में चार चार लोगों की हत्या से, जबकि दो बवाल और हिंसा से संबंधित हैं। पुलिस ने 23 अप्रैल 2025 को इस प्रकरण में न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था। पूछताछ में पुलिस ने अफरोज पर हिंसा के दौरान गोलीबारी करने और चार युवकों को गोली मारने की बात स्वीकार करने का दावा किया था।

शारिक साठा का करीबी मुल्ला अफरोज।
दो मुकदमों में जमानत भी खारिज
अफरोज को जिला न्यायालय से भी राहत नहीं मिली। 19 मई 2025 को एफआइआर संख्या 340/24 और 21 मई 2025 को एफआइआर संख्या 339/24 में उसकी जमानत अर्जी जिला जज ने खारिज कर दी थी। 16 और 20 मई 2026 को जिला न्यायालय में अफरोज, गुलाम समेत अन्य आरोपितों की पेशी और बयान वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज किए गए।

शारिक साठा।
13 अक्टूबर 2025 को लगा था एनएसए
पुलिस ने अफरोज के खिलाफ 13 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की थी। इसके बाद उसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर एनएसए की कार्रवाई को चुनौती दी थी। उसने खुद को गलत तरीके से फंसाए जाने का आरोप लगाया था।
आठ जून 2026 को न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद एनएसए के तहत निरुद्ध अफरोज ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी एनएसए के तहत निरुद्ध रखने की कार्रवाई रद कर दी। कोर्ट ने कहा कि केवल आरोपित का कबूलनामा हिरासत का आधार नहीं हो सकता। साथ ही गैरकानूनी निरुद्ध रखने के आदेश के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
