जावेद हबीब की बढ़ी राहत: 7 करोड़ की ठगी के 32 मुकदमे खत्म, निवेशकों को लौटाए पैसे
मशहूर हेयर ड्रेसर जावेद हबीब, उनके बेटे ओनस हबीब और सहयोगी सैफुल के खिलाफ 7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के ...और पढ़ें

जावेद हबीब
HighLights
पुलिस ने न्यायालय में पेश किए थे निवेशकों द्वारा दिए शपथ पत्र, सात करोड़ की धोखाधड़ी का मामला
संवाद सहयोगी, संभल। एफएलसी कंपनी में निवेश के नाम पर लगभग सात रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में घिरे मशहूर हेयर ड्रेसर जावेद हबीब, उनके बेटे ओनस हबीब और सहयोगी सैफुल के खिलाफ दर्ज 32 मुकदमों की कार्रवाई अब समाप्त हो गई है। निवेशकों की रकम वापस किए जाने के बाद शिकायतकर्ताओं ने पुलिस को शपथ पत्र दिए।
पुलिस ने न्यायालय में शपथ पत्र के साथ मुकदमों में एफआर लगा दी। इनमें रकम वापस मिलने और मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहने की बात कही गई। मामला सितंबर 2023 का है। संभल शहर के एक होटल में आयोजित सेमिनार में जावेद हबीब अपने बेटे ओनस हबीब के साथ पहुंचे थे।
स्थानीय सहयोगी रायसत्ती निवासी सैफुल के माध्यम से लोगों को एफएलसी कंपनी में निवेश कराने के लिए 50 से 70 प्रतिशत तक मुनाफे और मासिक ब्याज का लालच दिया गया था। इसके बाद कई लोगों ने कंपनी में रकम निवेश की।
मार्च 2024 में भी कुछ लोगों से धनराशि जमा कराई गई। निर्धारित समय पर न तो ब्याज मिला और न ही मूलधन वापस किया गया। शिकायतों के बाद रायसत्ती थाने में जावेद हबीब, ओनस हबीब और सैफुल के खिलाफ अलग-अलग कुल 32 प्राथमिकी दर्ज की गई थीं।
पुलिस की जांच में इस प्रकरण में लगभग सात करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की बात सामने आई थी। आरोपितों की तलाश के लिए पुलिस ने नोटिस और सर्च वारंट की कार्रवाई भी की थी।
जावेद हबीब और उसके बेटे ओनस के खिलाफ तत्कालीन एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने छह अक्टूबर 2025 को लुकआउट नोटिस भी जारी किया था। 14 अक्टूबर को रायसत्ती थाना पुलिस ने दिल्ली की फ्रेंड्स कालोनी स्थित जावेद हबीब के आवास पर दबिश दी थी, लेकिन वहां कोई नहीं मिला था।
बाद में निवेशकों की रकम लौटाने को लेकर आरोपित पक्ष की ओर से भुगतान किया जाने लगा। रकम मिलने के बाद शिकायतकर्ताओं ने जावेद हबीब के वकील के माध्यम से पुलिस को शपथ पत्र दिए थे।
शपथ पत्रों में उन्होंने धनराशि प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए मुकदमों में आगे कार्रवाई नहीं चाहने की बात कही। थानाध्यक्ष सौरभ त्यागी ने बताया कि पुलिस ने न्यायालय में शपथ पत्र और अंतिम रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष पेश की थी। न्यायालय ने इन शपथ पत्रों को आधार बनाकर संबंधित मुकदमों की कार्रवाई समाप्त कर दी।
