सम्भल: नगर के बाल विद्या मंदिर के छात्र मुदित रस्तोगी ने बताया कि वह पढ़ाई को कभी बोझ नहीं समझा। इतना ही नहीं खेलकूद के साथ ही पढ़ाई के लिए भी समय निकाला। क्योंकि जब स्वजन खेलकूद को मना नहीं करते थे तो हमें स्वयं ही बिना किसी रोकटोक के पढ़ाई करनी चाहिए थी। सभी से यही कहूंगा कि पढ़ाई के दौरान नोट्स बनाते हुए चले। सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल के छात्र देवांश ने बताया कि मेरा लक्ष्य सीए बनना था। ऐसे में मुझे सिर्फ अपना लक्ष्य दिखाई दे रहा था। पढ़ाई किसी के दबाव में नहीं हो पाती है। क्योंकि यदि हम किसी के दबाव में पढ़ाई करेंगे तो पूरी ध्यान से नहीं कर पाएंगे, लेकिन यदि हमने अपना लक्ष्य तय कर लिया है तो पढ़ाई बोझ नहीं बल्कि मजे की लगेगी।

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