संभल: खतौनी-आधार में नाम अलग होने से अटकी फार्मर ID, 56% काम पूरा, 12 सचिवों का वेतन रुका
संभल जिले में खतौनी और आधार कार्ड में नाम भिन्न होने से किसानों की फार्मर आईडी बनाने का कार्य बाधित है, जिससे केवल 56% कार्य ही पूरा हो पाया है। लापरवाही बरतने वाले 12 सचिवों का वेतन रोक दिया गया है। कृषि विभाग किसानों से त्रुटियाँ ठीक करवाने की अपील कर रहा है ताकि वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

प्रतीकात्मक चित्र
संवाद सहयोगी, जागरण, बहजोई। खतौनी और आधार में नाम असमानता जिले में फार्मर आइडी प्रक्रिया का सबसे बड़ा अवरोध बनी हुई है। जनपद में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्राप्त करने वाले किसानों की कुल संख्या 3,39,608 है। जिनमें से 2,84,055 किसान सत्यापित हैं। इन्हीं किसानों को फार्मर आइडी से जोड़ने का कार्य जारी है।
अब तक जन सेवा केंद्रों के माध्यम से 1,52,512 फार्मर आइडी बनाई गई हैं, किसानों ने स्वयं 25,492 आइडी बनाई हैं, पंचायत सहायकों ने 10,728 आइडी बनाई हैं और शिविर लगाकर 6,168 आइडी बनाई गई हैं, जिससे कुल 1,94,900 आइडी तैयार हो चुकी हैं जबकि 15,953 आवेदन लंबित हैं और पूरी प्रक्रिया का प्रतिशत 56.80 है।
सबसे गंभीर समस्या यह है कि खतौनी और आधार कार्ड में नाम समान न होने पर पोर्टल आइडी निर्माण की अनुमति नहीं देता, जिससे हजारों मामले अटक रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब आधार अनुरूप नाम सुधार की सुविधा शुरू की गई है और लेखपालों को लागिन आइडी उपलब्ध कराकर राजस्व अभिलेखों में नाम संशोधन का अधिकार दिया गया है जिससे दोनों दस्तावेज समान किए जा सकें।
दूसरी चुनौती यह है कि कई किसानों की जमीन जिस गांव में है, वे वहां रहते नहीं हैं और फील्ड टीम उन्हें ढूंढ नहीं पा रही जिससे कई गांवों में प्रगति रुक जाती है। गलत मोबाइल नंबर, मृतक किसान, साझा खातों में सदस्यों की संख्या अधिक होने और खतौनी की लिखावट संबंधी त्रुटियां भी प्रक्रिया को लगातार रोकती हैं।
सभी ब्लाकों को प्रतिदिन लक्ष्य तय करते हुए निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी किसान छूट न पाए और ग्राम पंचायतों में लगातार सत्यापन और आइडी निर्माण की गति बनाए रखी जाए ताकि जिले का लक्ष्य समय पर पूरा हो सके। मुख्य विकास अधिकारी के अनुसार गांव में सेंसस कोड और एलजीडी कोड में अंतर होने से भी समस्या आ रही है।
आधार जैसा नाम खतौनी में कर सकते संशोधित
जिन किसानों के समक्ष ऐसी समस्या आ रही है कि उनका आधार में नाम कुछ अलग है और खतौनी में नाम कुछ अलग है तो वह आधार जैसा नाम खतौनी में दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें लेखपाल के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करानी होगी और लेखपाल अपने लागिन पर जाकर ऐसा कर सकेगा जिससे फार्मर आइडी बनाने की में आ रही दिक्कत भी दूर होगी।
लापरवाही पर 12 पंचायत सचिवों का वेतन रोका
फार्मर आइडी निर्माण में धीमी प्रगति को देखते हुए 12 पंचायत सचिवों के वेतन रोके जाने के निर्देश दी दिन पूर्व दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कई ग्राम पंचायतों में प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सकी है। फिलहाल जवाबदेही तय करते हुए प्रत्येक ब्लाक को 100 फार्मर आइडी प्रतिदिन बनाने का लक्ष्य दिया गया है। जनपद में आठ ब्लाक होने के कारण रोजाना 800 किसानों की आइडी बनाई जानी निर्धारित है, जिसका सीधा प्रभाव यह है कि जिले की कार्य गति तेज हुई है और संभल अब तेजी से कार्य करने वाले टाप फाइव जिलों में शामिल है।
किसान स्वयं या जनसेवा केंद्र से भी बना सकते आइडी
जिले में फार्मर आइडी निर्माण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए यह सुविधा शुरू की गई है कि किसान चाहे तो स्वयं कृषि विभाग के पोर्टल से या फिर नजदीकी जन सेवा केंद्र से अपनी फार्मर आइडी बना सकते हैं। इसके लिए किसानों को केवल खतौनी, आधार कार्ड और एक सक्रिय मोबाइल नंबर की आवश्यकता होगी।
पोर्टल पर ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण के बाद किसान अपनी विवरण भर सकते हैं और आइडी जनरेट कर सकते हैं। यह व्यवस्था उन किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जिनके गांव में फील्ड टीम पहुंच नहीं पा रही या जिनका पता उपलब्ध नहीं है।
एसआइआर के साथ साथ फार्मर आइडी जिले की प्राथमिकता है और सभी ब्लाकों को प्रतिदिन निर्धारित लक्ष्य हर हाल में पूरा करना होगा। नाम असमानता और किसानों की अनुपलब्धता जैसी चुनौतियों के समाधान के लिए लेखपालों और फील्ड टीमों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। सभी किसानों की आइडी समय पर बनाना अनिवार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- गोरखनाथ भट्ट, सीडीओ, संभल।
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