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विश्व साइकिल दिवस: गाजियाबाद से दिल्ली दफ्तर जाने-आने को प्रतिदिन 56 KM साइकिल चलाते हैं पर्यावरण विज्ञानी

Published: Tue, 02 Jun 2026 03:50 PM (IST)

सहायक पर्यावरण विज्ञानी जयप्रकाश गुप्ता गाजियाबाद से दिल्ली अपने कार्यालय तक प्रतिदिन 56 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं, जिससे वे ऊर्जा बचाते हैं और पर्यावरण व स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाते हैं।

अमरोहा में साइकिल लेकर पहुंचे जयप्रकाश के साथ फोटो खिंचाता युवक। सौ.स्वयं

अमरोहा में साइकिल लेकर पहुंचे जयप्रकाश के साथ फोटो खिंचाता युवक। सौ.स्वयं

HighLights

  1. 2018 से नियमित साइकिल का उपयोग कर रहे हैं श्रीराम इंस्टीट्यूट फार इंडस्ट्रियल रिसर्च सेंटर में सहायक पर्यावरण विज्ञानी जयप्रकाश गुप्ता 

  2. अपने गृह नगर उत्तर प्रदेश में संभल जिले के बहजोई गांव आने-जाने के लिए भी नहीं करते हैं ट्रेन, बस या कार का उपयोग 

  3. स्वास्थ्य के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण के आह्वान के प्रति भी लोगों को जागरूक कर रहे लोगों को 

मनमोहन वार्ष्णेय, बहजोई (संभल)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों उर्जा के मामले में देश की निर्भरता को कम करने के लिए लोगों से अपील की थी। ऐसे में एक पहल उत्तर प्रदेश के संभल से सामने आई है, जोकि उर्जा निर्भरता को ही कम नहीं करती है, बल्कि पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को भी स्वस्थ रखती है। इस पहल का जुड़ाव है एनसीआर से।

वर्तमान में गाजियाबाद में रहने वाले सहायक पर्यावरण विज्ञानी जयप्रकाश गुप्ता घर से दिल्ली स्थित कार्यालय तक साइकिल से ही आते-जाते हैं। दोनों तरफ का करीब 56 किलोमीटर का सफर ही नहीं, संभल में बहजोई पैतृक आवास पर भी कभी आना हो तो ट्रेन, बस या कार नहीं... करीब 150 किलोमीटर के इस सफर में साइकिल ही उनकी हमसफर होती है। वह खुद प्रतिवर्ष करीब सात हजार किलोमीटर साइकिल चलाकर 12 वर्ष में करीब 32 किलोग्राम वजन कम कर चुके हैं।

सेहत की नजीर पेश करने के साथ 20 लोगों की टीम बनाकर औरों को भी फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। जयप्रकाश गुप्ता कहते हैं कि साइकिल एक, फायदे अनेक...। इंसान के साथ ही पर्यावरण की सेहत सुधारती ही है। पेट्रोल-डीजल की अंधाधुंध बढ़ती कीमतों के बीच जेब को राहत भी देती है। उनकी मुहिम से अब तक 100 से अधिक लोग साइकिलिंग से जुड़ चुके हैं।

जयप्रकाश गुप्ता दिल्ली में कश्मीरी गेट स्थित श्रीराम इंस्टीट्यूट फार इंडस्ट्रियल रिसर्च सेंटर में सहायक पर्यावरण विज्ञानी हैं और संजय नगर सेक्टर-23 (गाजियाबाद) में रहते हैं। आफिस जाने में एक घंटा 15 मिनट और वापसी में ट्रैफिक अधिक होने से एक घंटा 30 मिनट समय लगता है। विशेष परिस्थिति न होने पर गृह नगर साइकिल से जाते-आते हैं। वहीं परिवार के अन्य सदस्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे ट्रेन और बस का उपयोग करते हैं।

वह बताते हैं कि कालेज के दिनों में अनियमित जीवनशैली के कारण 35 साल की उम्र में ही वजन 100 किलोग्राम से अधिक हो गया था। दिल्ली-गाजियाबाद के प्रदूषण के कारण उन्हें श्वास संबंधी समस्याओं समेत कई बीमारियां हो गई। वर्ष 2018 से नियमित रूप से साइकिल चलाना शुरू किया। साइकिलिंग और व्यायाम से जीवन में बड़ा बदलाव आया। अब 47 साल की उम्र में उनका वजन 68 किलोग्राम है। वह गाजियाबाद, पटना, दिल्ली, मुंबई आदि शहरों में साइकिल की 100 से भी अधिक प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के साथ ही 150-200 किलोमीटर तक के आयोजन स्थल साइकिल से जाते हैं, इससे दूर होने पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जाते। कोशिश रहती कि इवेंट शनिवार अथवा रविवार को हो, जिससे काम पर असर न पड़े। इनमें अब तक करीब 80 मेडल/ट्राफी मैराथन दौड़ और साइकलिंग इवेंट में प्राप्त कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री की अपील का होने लगा असर

हाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण का आह्वान किया। इसके बाद लखनऊ में जिला जज और न्यायिक अधिकारी प्रति शनिवार को साइकिल से कोर्ट पहुंच रहे हैं। मुरादाबाद में मंडलायुक्त आंजनेय सिंह की पहल पर प्रशासनिक अधिकारियों और आम जनता ने साइकिल का उपयोग बढ़ाया है। युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने 'संडे आन साइकिल' मुहिम भी शुरू की है। कुछ समय से कई नेता और अधिकारी शनिवार और जरूरत पड़ने पर रविवार को साइकिल से ही सफर कर रहे। जयप्रकाश को भी इससे बल मिला है। वह लोगों को प्रधानमंत्री की अपील से भी जागरूक कर रहे हैं।


नियमित साइकिल चलाने से रक्त संचार बेहतर और हृदय रोगों का खतरा कम होता है। वजन और पेट की चर्बी नियंत्रण के अलावा जोड़ों और मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। सुबह साइकिल चलाने से मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे मानसिक सतर्कता और याददाश्त तेज होती है।- डॉ. तरुण पाठक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), संभल