सम्भल : जब ज्यादातर आबादी नींद की आगोश में रहती है तो उस समय यानी सुबह के चार बजे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क की नींद टूट जाती है। यह प्रक्रिया चुनाव के लिए नई नहीं है। सुबह उठने के बाद अपने कमरे तथा सीढी का दरवाजा आम जन के लिए खोल देते हैं। न घर में चोरी का डर और न कोई भय। कोई भी सीढी के रास्ते घर में दाखिल होकर उनके कमरे में आ जाता है और जब नमाज के बाद वह वापस आते हैं तो उनसे अपनी बात कहता है। यह सब पिछले 70 सालों से उनकी दिनचर्या में शामिल है। राजनीति में आने के पहले न यह क्रम टूटा और न नेता बनने के बाद। सुबह चार बजे के बाद कुछ समय खुद के लिए फिर नियमित तौर पर अदा की जाने वाली फजर की नमाज। नमाज के बाद प्रत्याशी जब अपने में पहुंचते हैं तो वहां आसपास के काफी संख्या में लोग मौजूद मिले। अंदर आने के बाद अभिवादन का दौर चला फिर प्रत्याशी शफीकुर्रहमान बर्क अखबार पढ़ने में व्यस्त हो गए। बीच बीच में सबसे बातचीत, गांवों का माहौल, क्षेत्र की हलचल, एक दिन पहले की रणनीति और उस दिन का डे चार्ट। बीच बीच में सब कुछ सुनते हैं। देश विदेश के राजनीतिक हलचल की खबरों को एक-एक लाइन पढ़ने के बावजूद बिना कोई प्रतिक्रिया दिए सुबह के साढे आठ बजे नहाने के बाद नाश्ता और फिर दवा खाने का क्रम चला। साढ़े नौ बजे वापस अपने कमरे में जब पहुंचे तो क्षेत्र से आने वालों की संख्या बढ़ गई। कुंदरकी के राशिद पहुंचे और प्रत्याशी से बात की। फिर उसी समय गांव से सपाई पहुंचे और सबसे हालचाल लेने के बाद प्रत्याशी सीढी से नीचे उतरे और उनका काफिला असमोली क्षेत्र के हाजीपुर की ओर निकल गया। यहां प्रत्याशी के सबसे पुराने समर्थक व साथी नईम के निधन की जानकारी के लिए प्रत्याशी वहां रवाना हुए। इसी कारणवश उन्होंने पूरे दिन नईम के घर पर ही बिताने को ठानी और अपने शाम तक के सारे कार्यक्रम निरस्त कर दिए। पांच टाइम के नमाजी शफीकुर्रहमान बर्क ने शाम के बाद असमोली क्षेत्र में गांवों में घूमे और लोगों से मिलकर सपा के पक्ष में माहौल बनाया। रास्ते में उन्होंने 1 बजे जोहर की नमाज, शाम पांच बजे असर की नमाज, शाम 6.45 बजे के पहले मगरिब की नमाज तथा रात में 8.45 बजे इशा की नमाज भी अदा की। रात में 11 बजे उनका काफिला उनके आवास दीपा सराय पहुंचा।

Posted By: Jagran

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