हादसे में कटे हाथ तो पैरों से लिखी तकदीर, 11 की उम्र में गंवाई उंगलियां... आज सिलाई सिखा बन रहीं मिसाल
11 साल की उम्र में हादसे में हाथ गंवाने वाली साजिदा ने हार नहीं मानी और पैरों से अपनी तकदीर ...और पढ़ें

दायें हाथ के अंगूठे से पेन पकड़कर लिखतीं और कटे हाथ की मदद से सिलाई करतीं साजिदा
HighLights
मशीन की चपेट में आकर 11 साल की साजिदा ने खोया एक हाथ और चार उंगलियां
सौरभ सक्सेना, चंदौसी। जब बच्चियों के हाथों में खिलौने और मन में अरमान होते हैं, उसी उम्र में कुटी मशीन से साजिदा का बायां हाथ कोहनी तक और दाहिने हाथ की चार उंगलियां कट गईं। खून से लथपथ और दर्द से चीखती उस मासूम को देखकर हर कोई कांप उठा था। लोगों ने मान लिया था कि अब सजिदा की पूरी जिंदगी तरस की बेड़ियों में कटेगी, लेकिन, साजिदा ने तरस नहीं बल्कि तालीम का रास्ता चुना और अपने आंसुओं को स्याही बनाकर पैरों से अपनी तकदीर लिख डाली।
जनेटा निवासी साजिदा आंगनबाड़ी वर्कर हैं। वह बताती हैं कि साल 2007 में 11 साल की उम्र में छठी कक्षा में पढ़ रही थीं। इसी दौरान कुटी मशीन की चपेट में आकर हादसा हो गया। हादसे के बाद उन्हें दुलारने वाले लोग तरस खाने लगे, लेकिन उन्हें किसी की सहानुभूति नहीं चाहिए थी।
स्कूल छूटने का डर सताया, तो हार मानने के बजाय पैरों को ही अपना हाथ बना लिया। पैर के अंगूठे से लिखकर सातवीं की परीक्षा दी। हालांकि पैर से लिखने में पसीने छूट जाते थे, लेकिन साजिदा ने यह भी कर दिखाया। सातवीं की परीक्षा देने के बाद वह तीन साल तक हाथ के अंगूठे से पेन पकड़ने को जूझती रहीं।
न जाने कितनी बार पेन उस कटे हुए हाथ से फिसला और निराशा के आंसुओं ने घेरा, लेकिन हर बार जब पेन गिरता, साजिदा की हिम्मत और बढ़ जाती। उनकी इस जिद के आगे तकदीर को भी झुकना पड़ा। हाईस्कूल से लेकर एमए (होम सांइस) की परीक्षा उन्होंने इसी एक अंगूठे के सहारे लिखकर दी।
अब दूसरों को बना रही आत्मनिर्भर
साजिदा के परिवार में उनकी अम्मी और छह भाई-बहन हैं। एक बहन और दो भाइयों की शादी हो चुकी है, लेकिन दोनों छोटी बहनों की जिम्मेदारी साजिदा के कंधों पर भी है।
वह न केवल इस जिम्मेदारी को निभा रही हैं, बल्कि दूसरों को भी आत्मनिर्भर बना रही हैं। जो हाथ कभी खुद दूसरों के मोहताज हो गए थे, आज वे गांव की अन्य बालिकाओं को सिलाई और कढ़ाई का हुनर सिखा रहे हैं।
चीजें पकड़कर देखते थे मां-बाप
साजिदा बताती हैं कि वालिद मो. हनीफ और वालिदा नसीम जहां ने उनका हर कदम पर हौसला बढ़ाया। जब उनके साथ हादसा हुआ तो दोनों अपने अंगूठे से चीजें पकड़कर देखते थे कि उन्हें ऐसा करने में कितनी परेशानी होती है। यह देखकर उनके आंसू आ जाते थे। साजिदा के वालिद का 2021 में इंतकाल हो गया था। साजिदा भविष्य में शिक्षक बनना चाहती हैं।
