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चंदौसी की खास कारीगरी: मथुरा, वृंदावन और हरिद्वार के मंदिरों में गूंजेगा नाम, कान्हा जी के लिए तैयार हो रही भव्य पोशाकें

Published: Tue, 01 Sep 2026 08:19 PM (IST)

चंदौसी के कारीगर देवी-देवताओं के लिए भव्य पोशाकें बनाते हैं, जिनकी मांग मथुरा, वृंदावन सहित देश के कई बड़े शहरों ...और पढ़ें

चंदौसी में पोशाक तैयार करते कारीगर

चंदौसी में पोशाक तैयार करते कारीगर

HighLights

  1. कच्चा कटरा और हाथी मुहल्ले में दो परिवार कर रहे देव मूर्तियों के लिए पोशाक बनाने का काम

संवाद सहयोगी, चंदौसी (संभल)। शहर के कारीगरों द्वारा तैयार की जाने वाली देवी-देवताओं की भव्य पोशाकें अपनी खास कला और गुणवत्ता के चलते न केवल स्थानीय बल्कि देश के कई बड़े शहरों के मंदिरों की शोभा बढ़ा रही हैं। यहां बनने वाली पोशाकें अपनी खास कारीगरी के चलते दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं। डिमांड होने की वजह से सालभर कारीगर आर्डर पूरा करने में जुटे रहते हैं।

चंदौसी के कच्चा कटरा निवासी अमित कुमार और हाथी मुहल्ला निवासी उमाशंकर तोमर का परिवार पीढ़ियों से इसी कारोबार से जुड़ा हुआ है। दोनों ही परिवारों में पोशाक बनाने का काम किया जाता है। जन्माष्टमी को लेकर इन दिनाें उनके घरों में दिनरात काम हो रहा है। इस बार 100 से अधिक आर्डर मिले हैं, जिन्हें पूरा किया जा रहा है।

कारीगर अमित कुमार ने बताया कि उनके बाबा सत्यदेव ने इस काम की शुरुआत की थी, जिनसे उनके पिता प्रेमपाल ने यह कला सीखी। अब अमित खुद इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इस कार्य में उनकी मां मुन्नी और पत्नी शिखा भी पूरा सहयोग करती हैं।

वह बताते हैं कि वैसे तो सालभर पोशाक बनाने का चलता है, लेकिन विशेष रूप से रामनवमी, नवरात्र, शिवरात्रि, जन्माष्टमी, दीपावली आदि त्योहारों पर कारोबार अच्छा रहता है। शेष सामान्य दिनों में दाल रोटी मिलती रहती है।

त्योहारों के समय अनुमानित पोशाकों से एक से डेढ़ लाख की इनकम हो जाती है। इस बार उन्हें बदायूं, रामपुर संभल, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा समेत आसपास के शहरों के मंदिरों से पोशाक तैयार करने के लिए 50 से अधिक आर्डर मिले हैं।

जिन्हें वह दिनरात परिवार की मदद से तैयार कर रहे हैं। जन्माष्टमी से पहले पोशाक तैयार करके देनी है ऐसे में फिलहाल नए आर्डर लेने बंद कर दिए हैं। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा तैयार पोशाकों की मांग मथुरा, वृंदावन, हरिद्वार, ऋषिकेश, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा और दिल्ली जैसे महानगरों के प्रमुख मंदिरों तक है।

बीते दिनों दो भक्त चंदौसी से सांवलिया सेठ और रमणरेती के राधा कृष्ण मंदिर के लिए पोशाक तैयार कराकर ले गए हैं। 15 से अधिक पोशाक के नए आर्डर भी मिले हैं। इसके अलावा उनके द्वारा देव मूर्तियों के लिए मुकुट और पगड़ी भी तैयार की जाती हैं।

त्योहार पर बढ़ जाती है व्यस्तता

हाथी मुहल्ला निवासी उमाशंकर तोमर का परिवार भी पिछले 22-23 वर्षों से देव मूर्तियों के लिए पोशाकें बनाने के कार्य में सक्रिय है। उमाशंकर ने बताया कि जन्माष्टमी का पर्व नजदीक आते ही काम कई गुना बढ़ जाता है। एक सुंदर पोशाक को तैयार करने में दो से तीन दिन का समय लगता है, जिसके चलते दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है।

उन्होंने बताया कि गुजरात के सूरत से जरी और शनील का कपड़ा और दिल्ली से गोटा, लेस और मोती मंगाकर इन पोशाकों को आधुनिक और पारंपरिक रूप दिया जाता है। एक से डेढ़ फीट की मूर्ति के लिए 400 रुपये में एक पोशाक तैयार होती है।

इसके अलावा कपड़े की क्वालिटी और साज सज्जा का खर्च अलग आता है। उन्होंने बताया कि 40 से अधिक आर्डर, उन्हें आसपास के शहरों से मिले हैं। जिन्हें दिनरात पूरा किया जा रहा है। उनके इस कार्य में बेटे मोहित और रोहित भी हाथ बंटाते हैं।

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