जेएनएन, चन्दौसी: गांव चितौरा निवासी आइटीबीपी के जवान प्रदीप यादव शुक्रवार की सुबह अरुणाचल प्रदेश से सटी चीन सीमा एलएसी पर साथियों के साथ पेट्रोलिग करते समय शहीद हो गए। उच्च अधिकारियों ने पहले जवान के स्वजनों को चोटिल होने की जानकारी दी। दोपहर बाद उन्होंने जवान के शहीद होने की पुष्टि की। हालांकि अभी तक चचेरे भाई के अलावा अन्य स्वजनों को इस मामले की जानकारी नहीं दी गई है। कुढ़फतेहगढ़ थाना क्षेत्र के गांव चितौरा निवासी नंदराम सिंह यादव के चार बेटे हैं। इसमें से तीन बेटे सेना में हैं। तीसरे नंबर के पुत्र प्रदीप यादव (32) वर्ष 2009 में आइटीबीपी (तिब्बत सीमा सुरक्षा बल) में भर्ती हुए थे। जब वर्ष 2020 में चीन सीमा पर विवाद हुआ तो प्रदीप यादव को भी अरुणाचल प्रदेश से सटी चीन सीमा एलएसी पर तैनात कर दिया था। शुक्रवार को वह साथी जवानों के साथ अपने कैंप से 400 मीटर ऊंची पहाड़ की चोटी पर पेट्रोलिग कर रहे थे। वह एक पाइप के सहारे पहाड़ की चोटी पर जा रहे थे। उस समय वहां बर्फबारी हो रही थी। तभी पाइप से फिसल गए और चोटिल हो गए। हादसे के बाद उच्च अधिकारियों ने घायल होने की जानकारी फोन द्वारा जवान की पत्नी अनीता को दी। इसके बाद दोपहर 12 बजे प्रदीप यादव के फोन पर दोस्त अंकुर ठाकुर ने फोन किया तो अधिकारियों ने शहीद होने की पुष्टि की। हालांकि अभी तक अन्य स्वजनों को जवान के शहीद होने की जानकारी नहीं दी गई है। सीओ गोपाल सिंह ने बताया कि अभी तक जवान के स्वजनों को पूरी जानकारी नहीं दी गई है। मुझे जानकारी हुई है कि इनका भाई मौके पर जा रहा है। एक या दो दिन में शव आएगा। जान पर खेलकर बचाई थी तमाम लोगों की जिदगी

वैसे तो सेना का हर जवान देश के लिए हीरो होता है, लेकिन प्रदीप यादव को शायद ही कभी चन्दौसी भूल जाए। क्योंकि इस जवान ने छुट्टी पर होने के बाद भी तमाम लोगों की जिदगी बचाने के लिए खुद जान पर खेल गया था। दो वर्ष पहले आजाद रोड पर जब जूते के गोदाम में आग लगी तो हर कोई बचता हुआ नजर आया, लेकिन पुलिस और दमकलकर्मी मौके पर होने के बाद बावजूद यह जवान अकेला ही आग बुझाने के लिए जुट गया था और दीवार तोड़कर गोदाम के अंदर पानी पहुंचाया। अगर उस समय यह जवान हिम्मत नहीं दिखाता तो गोदाम की छत पर मोबाइल टावर था और वह गिर सकता था। दरअसल, चन्दौसी के आजाद रोड स्थित एक जूते के गोदाम में आग लग गई थी। आग इतनी भयंकर थी कि कोई गोदाम के अंदर नहीं जा पा रहा था। गोदाम का गेट भी बंद था। पूरे मुहल्ले में अफरा-तफरी मच गई थी। बराबर में मेंथा की फैक्ट्री थी। जिस गोदाम में आग लगी थी उसकी छत पर मोबाइल टावर लगा हुआ था। आग लगने की सूचना पर जिले के आला अधिकारियों के अलावा आसपास के जिलों की दमकल को भी मौके पर बुला लिया गया था, लेकिन मकान गिरने के डर से कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। उस समय गांव चितौरा निवासी आइटीबीपी का जवान प्रदीप यादव अवकाश लेकर घर आया हुआ था। वह भी सूचना पर मौके पर पहुंच गया। प्रदीप यादव अकेले ही गोदाम की छत पर पहुंच गए और एक साइड से दीवार तोड़ दी। इसके बाद दमकल कर्मियों को गोदाम में पानी पहुंचाने का रास्ता मिल गया। जवान ने खुद आगे आकर दमकल का पाइप लेने के बाद आग को बुझाने का काम किया। इसके बाद हर किसी ने जवान के इस हौसले की तारीफ की थी।

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