विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद नहीं पहुंची टीम, संभल में ASI ने मुसाफिरखाना देखा

Published: Wed, 09 Sep 2026 08:48 AM (GMT+05:30)Updated: Wed, 09 Sep 2026 08:50 AM (GMT+05:30)

संभल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने जामा मस्जिद की संरक्षित भूमि पर बने मुसाफिरखाने का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. एएसआई टीम ने संभल के मुसाफिरखाने का निरीक्षण किया।

  2. जामा मस्जिद की संरक्षित भूमि पर निर्माण की शिकायत।

  3. सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल और ड्रोन तैनात।

जागरण संवाददाता, संभल। मेरठ की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्वेक्षण सहायक अधिकारी पुनीत डोगरा ने पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हसनपुर मार्ग पर बने जामा मस्जिद के मुसाफिरखाने का निरीक्षण किया। आरोप यह है कि यह मुसाफिरखाना जामा मस्जिद के नाम दर्ज जमीन पर बना हुआ है। जबकि जामा मस्जिद की संपत्ति एएसआई के संरक्षण में है।

यह मुसाफिरखाना लगभग एक बीघा जमीन पर 1994 में बना था और वर्तमान में इसकी देखरेख जामा मस्जिद के सदर जफर अली कर रहे हैं।

टीम ने मुसाफिरखाने के भवन का निरीक्षण करते हुए उसके आसपास के जमीन को भी देखा है। मुसाफिरखाने क अंदर घुसकर उसके फोटो-वीडियो भी बनाए हैं। एसडीएम दफ्तर में लगभग आधे घंटे तक इस जमीन से जुड़े कागजात भी देखे हैं। यह शिकायत श्रीकल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष चंद्र त्यागी ने 31 अगस्त, 2026 को जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल से शिकायत की थी। उनका कहना था कि एएसआई संरक्षित इमारत (हरिहर मंदिर/जामा मस्जिद) के नाम से अन्य संपत्तियां भी दर्ज हैं।

musafir khana small

संभल में स्थित मुसाफिरखाना। जागरण

मुसाफिरखाने के फोटो-वीडियो बनाए, छावनी में तब्दील रहा चौधरी सराय क्षेत्र

एएसआई संरक्षित होने के बावजूद 14-15 वर्ष पूर्व इसकी संपत्ति पर बाबा बहाउद्दीन शाह नाम से मस्जिद बनाकर कब्जा कर लिया गया। पत्र में वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में हुई हिंसा में भी मस्जिद से जुड़े लोगों की भूमिका बताई। इसी शिकायतकर्ता ने सात सितंबर को दिए दूसरे प्रार्थना पत्र में मुसाफिरखाना को भी जामा मस्जिद की जमीन पर बने होने का आरोप लगाया था। लेकिन, मंगलवार को टीम ने मुसाफिरखाने का ही निरीक्षण किया मगर, बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद को नहीं देखा।

ड्रोन से हुई निगरानी, एसपी, एएसपी और एडीएम भी रहे

सुरक्षा की दृष्टि से कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ पीएसी, आरआरएफ के जवान भी मुस्तैद रहे। एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी, एडीएम सत्यप्रिय, एएसपी कुलदीप सिंह ने मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था को देखा। ड्रोन से भी निगरानी हुई।

एसडीएम विकास चंद्र ने बताया कि शिकायत में जो गाटा संख्या दर्शायी है। उन्हें दिखवाया गया तो वहां पर बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद नहीं बल्कि जामा मस्जिद के लिए बना मुसाफिरखाना बना हुआ है। इसलिए मुसाफिरखाने का निरीक्षण किया गया है। अब अधिकारी स्टोरी देंगे तो आगे की कार्रवाई होगी।

रिपोर्ट आने के बाद होगी अग्रिम कार्रवाई

एडीएम सत्यप्रिय ने बताया कि निरीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद अग्रिम कार्रवाई होगी। मुसाफिरखाने की देखरेख करने वाले जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने कहा कि यह तो वक्फ की जमीन पर बना हुआ है।

यह भी पढ़ें- 'मुन्ना' चोरी हो गया है, साहब उसे तलाश दो! एक अनोखे भैंसे के लिए मैनपुरी SP के पास पहुंचा पूरा गांव

350 वर्ष पुरानी मस्जिद, जामा मस्जिद से कोई नाता नहीं : अशरफ हामिदी

चौधरी सराय स्थित मस्जिद बाबा बहाउद्दीन शाह को जामा मस्जिद से जोड़कर किए जा रहे दावों पर तंजीम उलमाए अहले सुन्नत ने आपत्ति जताई। संगठन के जनरल सेक्रेटरी मौलाना फैजान अशरफ हामिदी ने कहा कि बाबा बहाउद्दीन शाह की मस्जिद करीब 350 वर्ष से अधिक पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद है और इसका अपना स्वतंत्र धार्मिक एवं ऐतिहासिक अस्तित्व है। इसका जामा मस्जिद से कोई संबंध नहीं है। कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से जुड़े किसी भी मामले में दावे प्रमाणित दस्तावेज और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ही किए जाने चाहिए।

यह भी पढ़ें- संभल में आर्य समाज मंदिर की 50 करोड़ की जमीन पर बने मकान और अवैध मजार पर चलेगा बुलडोजर! SDM कोर्ट का बड़ा फैसला

किसी ऐतिहासिक स्थल के संबंध में अपुष्ट अथवा भ्रामक जानकारी फैलाना उचित नहीं 

इंटरनेट मीडिया पर वीडियो बनाकर या बयान देकर किसी ऐतिहासिक स्थल के संबंध में अपुष्ट अथवा भ्रामक जानकारी फैलाना उचित नहीं है। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होने के साथ सामाजिक वातावरण भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मस्जिद बाबा बहाउद्दीन शाह और जामा मस्जिद से जुड़े ऐतिहासिक, राजस्व और अन्य सरकारी अभिलेखों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि जांच में कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत तथ्य या भ्रामक दावे कर जनता को गुमराह करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।