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सहारनपुर: वैदिक प्रज्ञा संस्था तथा देवी कपूरी वर्मा ट्रस्ट सहारनपुर के संयुक्त तत्वावधान में आचार्य डा. ओम प्रकाश वर्मा तथा स्व. कपूरी वर्मा के स्मृति दिवस पर अथर्ववेद पारायण यज्ञानुष्ठान, सम्मान समारोह तथा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

दिल्ली रोड स्थित साउथ सिटी में सर्वप्रथम नजीबाबाद की विदुषी आचार्या प्रियंवदा तथा पं.शिवकुमार शास्त्री के सानिध्य में यज्ञानुष्ठन सम्पन्न हुआ। तत्पश्चात गीतकार राजेंद्र राजन को गीत-गौरव तथा हृदय रोग विशेषज्ञ डा. अजय सिंह को मानव हितैषी सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके बाद काव्य सम्मेलन का आयोजन रूड़की के डा. योगेंद्रनाथ शर्मा, अरुण की अध्यक्षता में हुआ। कवि हरिराम पथिक ने अपनी कविता की कुछ पंक्तियां-मां गीता के ज्ञान सी, मां मुरली घनश्याम, मां केवल अक्षर नहीं, मां है अक्षरधाम प्रस्तुत की। डा. विजेन्द्र पाल शर्मा ने काव्यपाठ में कहा कि आज जब आंगन सुखों के मेघ छाए, हे पिता हरपल मुझे तुम याद आये। कवि राजेन्द्र राजन ने पढ़ा रिश्ते सहना भी जिम्मेदारी है, चाहे जितनी भी जंग जारी है, कितनी नाजुक घडी की सुईयां हैं, और ये वक्त कितना भारी है, मुजफ्फरनगर कवित्री सुशीला शर्मा ने कहा -फूल हर किस्म खिले हैं, चमन ये किसका है, रंग फजाओं में घुले हैं, चमन ये किसका है। डा. विरेन्द्रआजम ने पढ़ा वंदे मातरम गान लिखो तुम, गीता और कुरान लिखो तुम। डा. शिवशंकर यजुर्वेदी ने पढ़ा बोल जिनके मधुरतम हुए, काम भी जिनके अनुपम हुए, सच का चूमा जिन्होंने शिखर, वे ही नर से नरोत्तम हुए। हरिद्वार के रमेश रमन ने पढ़ा -तू अगर पुरवाई है तो बादलों के साथ आ, प्यास धरती की बुझा, ये पेड-पौधें, मत हिला। बालेश्वर जैन की कविता हिन्द सागर जब व्यथा से छटपटाता हो, चोट खाकर जब हिमालय तिलमिलाता हो, कौन सा कवि है, कि जो बंसी बजायेगा, जब कि मां कीआंख का आंसू बुलाता हो। इस दौरान महापौर संजीव वालिया, राजेन्द्र चुघ, डा.रघुवीरसिंह सेनी, अवनीश आर्य, वीरेन्द्र शर्मा दिनेश राणा, ज्ञानेश राणा आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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