सहारनपुर, जेएनएन। प्रदूषित हो चुकी हिडन, कृष्णा एवं काली नदी को जीवित करने के लिए बाबा मंगल गिरी पिछले एक दशक से आंदोलन कर रहे हैं। बाबा ने नदी बचाने के आंदोलन की शुरुआत ग्रामीणों की मदद से वर्ष 2009 में शुरु की थी। बाबा मंगलगिरी एक बार फिर साधू संतो को साथ लेकर आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं और इस बार उनकी लड़ाई आरपार की होगी।

एक जमाने में कल-कल बहने वाली हिडन नदी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। हिडन के जहरीले हो चुके पानी के कारण नदी किनारे बसे बीस से अधिक गांवों के तीन सौ से अधिक लोग विभिन्न बीमारियों की चपेट आकर मौत के मुंह में समा चुके हैं। इसे देख बाबा मंगल गिरी ने साधू संतों एवं ग्रामीणों के साथ मिलकर कई बार आंदोलन तक किये लेकिन प्रशासन की नींद नही टूटी। कई बार आंदोलन कर चुके बाबा मंगलगिरी ने एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में है। बाबा मंगल गिरी ने सबसे पहले हिडन नदी की सफाई के लिए वर्ष 2009 में भूख हड़ताल की थी, भूख हड़ताल के 9 वे दिन तत्कालीन मंत्री स्वर्गीय राजेंद्र सिंह राणा ने गांव में टंकी बनवाने का आश्वासन व जूस पिलाकर बाबा का आंदोलन समाप्त करा दिया था। नदी में पड़ने वाले स्त्रोतों पर कार्यवाही होते न देख बाबा मंगलगिरी ने वर्ष 2012 में काली, हिडन एवं कृष्णा नदी बचाओ आंदोलन के लिए बड़गांव क्षेत्र के गांव भगवानपुर स्थित मंदिर में भूख हड़ताल की। हड़ताल 11 दिन बाद तत्कालीन सांसद राघव लखनपाल शर्मा, एडीएम व एसडीएम रामपुर ने बाबा को आश्वासन देकर हड़ताल समाप्त करा दी थी। सपा की सरकार में हिडन को बचाने के लिए बाबा के आंदोलन की गूंज लखनऊ तक पहुंची तो अखिलेश यादव सरकार में हिडन की सफाई को अपनी प्राथमिकता में शामिल कर रोडमैप तैयार किया गया। हिडन नदी के स्त्रोत से इसका काम शुरू हुआ और हिडन नदी में गिरने वाले फैक्ट्रियों के कैमिकलयुक्त पानी को रोकने का काम शुरू हुआ। वन विभाग ने हिडन के जल प्रवाह को बनाए रखने के लिए इसके दोनो किनारों पर हर वर्ष वृहद पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है।

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