संजीव गुप्ता, सहारनपुर। बांसुरी की सुरीली तान दिव्यांग बांसुरी वादक बिजेंद्र पुंडीर की जिदगी है। वह अपनी नाक से ऐसी सुमधुर बांसुरी बजाते हैं कि फिजा सुरमयी होकर रस में गोते लगाने लगती है। यह देख हर कोई हैरत में पड़ जाता है। बांसुरी वादक बिजेंद्र पुंडीर ने ताउम्र इस कला को सहेजकर अपने फन से सहारनपुर जिले को रोशन किया, लेकिन उनके इस फन को संरक्षित करने के लिए हुक्मरानों ने कोई प्रयास नहीं किया। सैफई व सहारनपुर महोत्सव से लेकर दर्जनों विराट आयोजनों में अपने हुनर का जलवा बिखेर चुके बिजेंद्र ने उम्र के 62वें पड़ाव पर भी हार नही मानी है। वह नियमित बांसुरी बजाने का अभ्यास करते हैं, उन्हें यह उम्मीद है कि कभी तो उनकी बांसुरी को इंसाफ मिलेगा।

सहारनपुर निवासी बचपन से दिव्यांग ठा. बिजेंद्र सिंह पुंडीर नाक से बांसुरी बजाते हैं। यह कला उन्हें विरासत में नही मिली। बचपन का शौक ही इस कला को सीखने में अहम साबित हुआ। मूलत: नानौता के गांव भावसी रायपुर निवासी बिजेंद्र बताते हैं कि उन्होंने फिल्मी गीत दिल लूटने वाले जादूगर, अब मैंने तुम्हें पहचाना है, फिल्म संतोषी माता का भजन करती हूं तुम्हारा व्रत मैं स्वीकार करो मां, गाया। बिजेंद्र को दुख है कि एक कलाकार के रूप में सरकार से उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला।

यहां पर दिखाया अपना हुनर

मिलिट्री की कई डिवीजनों में हुए कार्यक्रमों में उन्होंने बांसुरी वादन किया। आगरा के शिल्पग्राम में कॉमनवेल्थ गेम्स के खिलाड़ियों के लिए उन्होंने बांसुरी वादन किया। वर्ष-2006 में सैफई महोत्सव में बांसुरी वादन किया, तब सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने उनका उत्साहवर्धन किया था। 1975 में माउंटेन इंफैंट्री डिवीजन हैड क्वार्टर बरेली, जाट रेजीमेंट ट्रेनिग सेंटर बरेली, 1979 में इंफैंट्री डिवीजन हैड क्वार्टर फिरोजपुर, 1983 में इंफैंट्री डिवीजन हैड क्वार्टर जम्मू, 1995 में ग्वालियर मध्यप्रदेश, 1998 में हरिद्वार दूधाधारी चौक महाकुंभ, 2005 में सहारनपुर महोत्सव, 2005 में प्रसिद्ध भजन गायक शर्मा बंधु के साथ, 2006 में सैफई महोत्सव-इटावा, 2006-संस्कृति विभाग उप्र सरकार द्वारा नानौता-बड़गांव और देवबंद में कार्यक्रम। विरद कला केंद्र द्वारा रिमाउंडट ट्रेनिग सेंटर, 2010 में टूरिस्ट फेस्टिवल आगरा में प्रस्तुति दी। वर्ष-2013 में कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी द्वारा सुल्तानपुर में उन्हें आमंत्रित किया गया था। हार्ट पेशेंट हैं फिर भी नहीं छूटी बांसुरी

बिजेंद्र हार्ट पेशेंट है, उन्हें दो स्टंट पड़े हैं, इसके बावजूद वह बांसुरी वादन का अभ्यास नहीं छोड़ते। वह 10 मिनट से लेकर एक घंटे तक नाक से बांसुरी बजा सकते हैं। अब वह अपने पुत्र सनी को यह कला सिखा रहे हैं।

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Posted By: Jagran