सहारनपुर(जेएनएन)। समान नागरिक संहिता के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खुलकर सामने आने की दारुल उलूम और देवबंदी उलेमा ने उसकी प्रशंसा की है। साथ ही लॉ कमीशन के सवालनामे पर सवाल खड़े करते हुए मुसलमानों से इसके बायकॉट का आह्वान किया है।

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दिल्ली में हुई मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पदाधिकारियों और नामचीन उलेमा की संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में यह कड़ा रुख दिखाया गया। इस बारे में प्रसिद्ध इस्लामी इदारा दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि हिंदुस्तान एक लोकतांत्रिक देश है। यहां संविधान में सभी धर्म के लोगों को मजहबी आजादी की गारंटी दी गई है। केंद्र सरकार सिविल यूनिफार्म कोड के बहाने मुस्लिमों समेत सभी अल्पसंख्यकों को उनकी धार्मिक क्रियाओं के साथ भी छेडछाड़ की कोशिश कर रही है।

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दारुल उलूम वक्फ के सदर मोहतमिम एवं मुस्लिम पर्सनल-लॉ-बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी ने कहा कि सरकार संविधान में दी गई धार्मिक आजादी को यूनिफार्म सिविल कोड के नाम पर छीनना चाहती है। दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी, मौलाना नदीमुल वाजदी, मुफ्ती आरिफ उस्मानी ने भी केंद्र सरकार के हलफनामे की निंदा की और बोर्ड के इस कड़े रुख की हिमायत करते हुए मुसलमानों से लॉ कमीशन के सवालनामे का बायकॉट करने का आह्वान किया।

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Posted By: Ashish Mishra

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