19 साल, 191 देश और साइकिल का साथ: तालिबान की कैद से अंटार्कटिका की बर्फ तक, सोमेन देबनाथ के जुनून की अनोखी कहानी
World cycle tour: बंगाल निवासी सोमेन देबनाथ ने 19 साल में साइकिल से 191 देशों की यात्रा की है, जिसका ...और पढ़ें

सोमेन देबनाथ। सौ. स्वयं
HighLights
विश्व यात्रा करने के बाद सोमेन देबनाथ भारत भ्रमण पर।
तालिबान ने जासूस समझ 24 दिनों तक कैद रखा।
अंटार्कटिका की बर्फ पर भी चलाई साइकिल।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। दुनिया घूमने का सपना तो बहुत लोग देखते हैं, लेकिन उसे साइकिल पर सवार होकर पूरा करने का जुनून कम ही लोगों में होता है। बंगाल के सुंदरबन निवासी सोमेन देबनाथ ने इसी जुनून के साथ करीब 19 वर्षों तक परिवार से दूर रहकर सातों महाद्वीपों के 191 देशों की साइकिल यात्रा पूरी की। इस दौरान उन्होंने करीब दो लाख किलोमीटर की दूरी तय की। अब विश्व यात्रा पूरी करने के बाद सोमेन देबनाथ भारत भ्रमण पर हैं।
गुरुवार को उनका सफर सहारनपुर पहुंचा। सोमेन ने बताया कि 24 वर्ष की उम्र में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विश्व भ्रमण का निर्णय लिया था। उनका उद्देश्य केवल अलग-अलग देशों को देखना नहीं था, बल्कि यात्रा के माध्यम से सामाजिक जागरूकता, मानव सेवा, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति एवं सद्भाव का संदेश देना भी था। करीब 19 वर्ष तक चले इस अभियान में उन्हें अलग-अलग देशों के लोगों से मिलने और उनकी संस्कृति को समझने का अवसर मिला।
उन्होंने करीब 10 देशों की भाषाएं भी सीखीं। विश्व यात्रा के दौरान सोमेन को कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि असम में उन्हें उल्फा उग्रवादियों ने पांच दिन तक बंधक बनाकर रखा। वहीं अफगानिस्तान में काबुल से हेरात जाते समय तालिबान ने उन्हें जासूस समझ लिया और करीब 24 दिनों तक कैद रखा। इस दौरान उनके साथ मारपीट भी की गई। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और अपना सफर जारी रखा।
यात्रा के दौरान उन्होंने अंटार्कटिका की बर्फीली सतह पर भी साइकिल चलाई। वर्ष 2020 में चीन में यात्रा के दौरान वह कोविड-19 से संक्रमित हो गए। बीमारी से उबरने के बाद उन्होंने दोबारा अपनी यात्रा जारी रखी। सोमेन ने बताया कि उन्होंने अफ्रीका के 52 देशों, मिडिल ईस्ट के 10, दक्षिण अमेरिका के 13, मध्य अमेरिका के आठ, कैरेबियन के आठ देशों समेत उत्तरी अमेरिका में अमेरिका और कनाडा की यात्रा की।
इसके अलावा मंगोलिया, चीन, जापान, कोरिया, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, आइसलैंड, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, म्यांमार और बांग्लादेश होते हुए भारत पहुंचे। सोमेन के लिए यह यात्रा केवल रोमांच ही नहीं, भावनात्मक परीक्षा भी रही। उन्होंने बताया कि 19 साल के सफर के दौरान उनके पिता का निधन हो गया, लेकिन वह उनसे अंतिम समय में नहीं मिल सके।
