सहारनपुर, जेएनएन। नगर निगम की लापरवाही के चलते बरसात में भारी जलभराव की आशंका प्रबल होती जा रही है। निगम के तमाम क्षेत्रों के सैकड़ों नालों का गंदा पानी बहा कर ले जाने वाले नाले गंदगी से अटे पड़े हैं। इन नालों की सफाई पर लाखों खर्च करने की घोषणा हाल में किए जाने पर भी सफाई नहीं हो पाई है। ऐसे मे मानसून के चलते ये नाले कहर बरसा सकते हैं।

सहारनपुर नगर निगम क्षेत्र में छोटे बड़े करीब 280 नाले हैं। निगम द्वारा प्रत्येक वर्ष अप्रैल में नालों की सफाई कराने के साथ ही मई के अंतिम सप्ताह तक तक सफाई कार्य पूरा कर लिया जाता था, जिससे तमाम क्षेत्रों में जलभराव की समस्या का 70 से 80 प्रतिशत समाधान हो जाता था, जबकि वर्ष 2013 में बरसात के दौरान चार दर्जन कालोनियों में भारी जलभराव होने से करीब 14 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, तथा सैकड़ों भवनों को नुकसान पहुंचा। इस बार निगम ने प्रमुख नालों की सफाई की पहल काफी देर से की है तथा जून के अंतिम सप्ताह में नालों की सफाई शुरुआत कराई गई। यह स्थिति तब है जब 200 से अधिक कालोनियों व तकरीबन 150 छोटे नालों का गंदा पानी बहा कर ले जाने वाला करेंजी नाला सहित कई प्रमुख नाले गंदगी से अटे पड़े हैं।

छोटे नालों की सफाई को निगम ने पूर्व में नाला गैंग लगाया था, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले है।वर्तमान में छह किमी लंबे करेंजी नाला, जेबीएस नाला, चिलकाना रोड नाला, गढ़ी मलूक नाले की सफाई की खानापूरी की जा रही है। यही कारण रहा कि मानसून की पहली बारिश के दौरान कुछ घंटों में ही अनेक क्षेत्रों में जलभराव शुरू हो गया था। करीब 22 लाख से इन नालों की सफाई प्रस्तावित

-मंडी समिति रोड से किशनपुरा ढमोला तक करेंजी नाला

-धोबीघाट से बालपुर पुलिया तक नाला

-नवादारोड काजीपुरा से चूना भट्टी तक नाला

-लेबर कालोनी से लेकर रेलवे फाटक तक नाला

-डूडा कार्यालय से ढमोला नदी तक नाला

-गढ़ी मलूक पार्क से शमशान घाट तक नाला इनका कहना है..

छोटे नालों की सफाई नाला गैंग द्वारा की जा रही थी। बड़े नालों की सफाई की योजना नहीं बन पाई थी। अब कांटेक्ट पर नालों की सफाई कराने का कार्य कराया जा रहा है, ताकि बरसात में होने वाले जलभराव की समस्या न बढ़ सके।

-श्यामबिहारी अग्रहरि, गैराज प्रभारी, नगर निगम सहारनपुर।

Posted By: Jagran

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