पांच गिरफ्तार; दो आरोपित फरार... फिर भी सवाल बरकरार कि नकली नोटों की खेप चेस्ट तक कैसे पहुंची!
सहारनपुर पीएनबी की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ के नकली नोटों के मामले में एनआईए की जांच जारी है। ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
पीएनबी सहारनपुर चेस्ट में 17.29 करोड़ के नकली नोट मिले।
एनआईए ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया, दो अभी फरार।
नकली नोटों के चेस्ट तक पहुंचने का तरीका अनसुलझा है।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। पीएनबी की करेंसी चेस्ट में मिले 17 करोड़ 29 लाख के नकली नोटों के मामले में जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) अभी तक उस अहम सवाल का जवाब नहीं तलाश पाई है कि आखिर नकली नोटों की खेप चेस्ट तक कैसे पहुंची। मामले में कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसी पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि दो आरोपित अभी भी फरार चल रहे हैं। घटना को एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नकली नोटों के चेस्ट तक पहुंचने की पूरी कड़ी सामने नहीं आ सकी है।
घंटाघर के सोफिया मार्केट स्थित पीएनबी की करेंसी चेस्ट से 17 करोड़ 29 लाख रुपये नकली मिलने के मामले में मेरठ के मुख्य प्रबंधक अरुण कुमार चौबे ने थाना सदर बाजार में जगाधरी करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार, सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील कुमार व सहारनपुर मंडल प्रबंधक रवि कांसे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। तीन सितंबर को एनआइए ने इस केस को सिविल पुलिस ने अपने हाथों में लिया था। इसके बाद एनआइए ने सबसे पहले जगाधरी चेस्ट के प्रबंधक अमित कुमार को चंड़ीगढ़ से गिरफ्तार किया था।
वहीं सविंदा ड्राइवर आदेश कुमार और तीन अन्य को भी एनआइए गिरफ्तार कर चुकी है। मामले की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर एजेंसी ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर आरोपितों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के दौरान नकली नोटों की सप्लाई और नेटवर्क से जुड़े कई बिंदुओं की पड़ताल की गई, लेकिन चेस्ट तक नकली नोटों के पहुंचने की प्रक्रिया अब भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि नकली नोटों की पहचान होने से पहले वे चेस्ट तक किस माध्यम से पहुंचे और इस पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। यदि नकली नोट किसी वैध करेंसी चैनल के जरिये चेस्ट तक पहुंचे, तो उस दौरान जांच और निगरानी की प्रक्रिया में चूक कहां हुई, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।
मामले में पांच आरोपितों की गिरफ्तारी के बावजूद दो आरोपितों का फरार होना जांच के लिए चुनौती बना हुआ है। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद ही नकली नोटों की सप्लाई, उनके स्रोत और चेस्ट तक पहुंचने की पूरी कड़ी के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है। एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी मामले से जुड़े कई सवालों का जवाब सामने नहीं आया है। नकली नोट कहां तैयार हुए, किस नेटवर्क के जरिये आगे भेजे गए और चेस्ट तक पहुंचने के दौरान किन स्तरों पर इनकी जांच हुई। इन बिंदुओं पर जांच एजेंसी की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
