स्मार्ट सिटी सहारनपुर में 'अंधेरा': 600 LED लाइट में आधी खराब, अब झांसी तक पहुंचेगी घोटाले की आंच
Saharanpur News: सहारनपुर में 20 लाख रुपये की एलईडी लाइट खरीद और स्थापना में अनियमितता सामने आई है, जिसमें लगभग ...और पढ़ें

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HighLights
सहारनपुर में एलईडी लाइट खरीद में अनियमितता।
20 लाख की 50% लाइटें छह माह में खराब हुईं।
नगर निगम ने कंपनी की जमानत राशि जब्त की।
जागरण संवादाता, सहारनपुर। स्मार्ट सिटी सहारनपुर में रोशनी व्यवस्था को बेहतर बनाने के नाम पर एलईडी लाइटों की खरीद और स्थापना में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। नगर निगम में एलईडी लाइटों से जुड़े मामलों की जांच शुरू होने के बाद अब झांसी की कार्यदायी संस्था भी जांच के घेरे में आ गई है।
करीब 20 लाख रुपये के टेंडर के तहत लगाई गई लगभग 600 एलईडी लाइटों में से 50 प्रतिशत लाइटें छह माह भी नहीं चल सकीं। कई खंभों पर लाइटें खराब पड़ी हैं। निगम ने कंपनी को पांच नोटिस भेजकर खराब लाइटों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। अब निगम ने कंपनी की दो लाख रुपये की जमानत राशि जब्त कर ली है। साथ ही जुर्माना लगाने और मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
नगर निगम में एलईडी लाइटों की खरीद, स्थापना और खराब होने से जुड़े मामलों की जांच चल रही है। इसी क्रम में झांसी की कार्यदायी संस्था द्वारा कराए गए करीब 20 लाख रुपये के काम को भी जांच के दायरे में लिया गया है। आरोप है कि कंपनी ने टेंडर के तहत शहर में लगभग 600 एलईडी लाइटें लगाईं, लेकिन गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने के कारण लाइटें कुछ ही माह में खराब हो गईं।
शहर में एलईडी लाइटें लगाने का उद्देश्य प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराना था। इसके लिए निगम की ओर से लाखों रुपये खर्च किए गए। हालांकि, लाइटों के खराब होने के बाद व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस काम पर लाखों रुपये खर्च किए गए, उसका लाभ लंबे समय तक नहीं मिल सका।
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कार्यदायी संस्था को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। ऐसे में अब निगम की ओर से अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। एलईडी लाइटों की खरीद और स्थापना में करीब 20 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद लाइटें छह माह भी नहीं चल सकीं। इससे काम की गुणवत्ता और कंपनी की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निगम की तरफ से लगाए गए नोटिसों का उद्देश्य कंपनी से खराब लाइटों को ठीक कराने और उनकी गुणवत्ता के संबंध में जवाब मांगना था।
