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सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामला: 12 अक्टूबर को होगी अगली सुनाई, हाई कोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें

Published: Sat, 12 Sep 2026 09:57 AM (IST)

हाई कोर्ट ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण में 6.41 करोड़ से अधिक की हर्जाना वसूली पर रोक लगा दी है। ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने 6.41 करोड़ हर्जाना वसूली पर रोक लगाई।

  2. कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद मिला पुराना कुआँ।

  3. मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। कलेक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण में हाई कोर्ट ने 6.41 करोड़ से अधिक के हर्जाना वसूली पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को की जाएगी। क्षतिपूर्ति की वसूली पर रोक को मस्जिद पक्ष ने राहत बताया है।

वहीं दूसरी ओर शासकीय अधिवक्ता का कहना है कि सुनवाई के न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, वह मंजूर होगा।
कलक्ट्रेट में सरकारी भूमि पर बनी मस्जिद को शनिवार पांच सितंबर को प्रशासन द्वारा ध्वस्त करा दिया गया था। यह कार्रवाई जिला जज न्यायालय के दो सितंबर के आदेश के बाद हुई थी।

जिला जज ने, 16 जुलाई के सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को यथावत रखा था जिसमें कब्जाधारक की बेदखली के आदेश दिए गए थे। मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबे की सफाई के दौरान स्थल पर रविवार छह सितंबर को पुराना कुआं निकला था।

6.41 करोड़ से अधिक के हर्जाना वसूली पर रोक

जिला प्रशासन के आग्रह पर यहां सोमवार सात सितंबर को उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग लखनऊ से सहायक पुरातत्व अधिकारी डॉ. मनोज कुमार यादव ने यहां पहुंचकर सीढ़ी से कुएं में उतरकर आरंभिक जांच की थी। बाद में उन्होंने बताया था कि यह संरचना कुएं की आकृति जैसी है जो 200-250 वर्ष पुराना लखौरी ईंटों से बना उत्तर मध्यकालीन युग का है।

मस्जिद पक्ष की ओर से मुतवल्ली तनवीर अहमद द्वारा कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई ने हाईकोर्ट द्वारा 6.41 करोड़ से अधिक के हर्जाना वसूली पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अक्टूबर नियत की गई है।

हाई कोर्ट द्वारा जो रिलीफ दी गई है वह ठीक है। उम्मीद करता हूं कि हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आएगा।- तनवीर अहमद, मुतवल्ली मस्जिद

हाई कोर्ट ने केवल रिकवरी पर स्टे दिया है। मामले में सुनवाई के बाद न्यायालय का जो भी फैसला आएगा, सभी के लिए मान्य होगा।- अवनीश कुमार, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता