सहारनपुर: हाई स्कूल के छात्र अर्पित व सन्नी को भी शायद यह नहीं पता था कि अब वह लौट कर नहीं आएंगे, जाते हुए दोनों के पापा ने टोका तो यही बोल कर निकले थे कि पापा बस पांच मिनट में आ जाएंगे..। शुक्रवार को यही बोल-बोल कर परिवार का हर एक सदस्य बिलख रहा था, जिन्हें ढांढस बंधाने के लिए लोगों की भीड़ जुटी थी।

पल्सर सवार दोनों ही छात्र अपने-अपने परिवार के इकलौते लड़के थे। आधी रात के बाद अर्पित व सन्नी की मौत की खबर जैसे ही घर पहुंची तो परिवारों में कोहराम मच गया। कैंसर रोग से पीड़ित सन्नी गुप्ता के पिता प्रवीण गुप्ता और उनकी पत्नी तो कुछ पल के लिए अचेत हो गए। सन्नी की दोनों बहनों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला।

यही हाल सेतिया विहार निवासी कपड़ा व्यापारी राकेश खुराना का था। इकलौते बेटे अर्पित की मौत का सुनकर राकेश दहाड़े मार-मार कर रोने लगे। बोले अब मैं किसके लिए ¨जदा रहूंगा, भगवान मुझे भी उठा ले। बेटी व पत्नी से लिपट-लिपट कर रो रहे राकेश को संभालने के लिए दर्जनों लोग आगे आए। चुप कराने की कोशिश, मगर वो शांत नहीं हो रहे थे। दोनों ही परिवारों ने किसी भी तरह की कार्रवाई न करवाने की बात कही और हाथ जोड़ कर बिना पोस्टमार्टम के ही शवों को साथ ले जाने की बात कही तो पुलिस ने भी चुपचाप शव परिजनों को सौंप दिए। शुक्रवार दोपहर तक राकेश खुराना व प्रवीण गुप्ता के अन्य नाते-रिश्तेदार भी पहुंच गए, जिसके बाद नुमाइश कैंप श्मशान घाट में दोनों का अंतिम संस्कार किया गया।

Posted By: Jagran

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