सहारनपुर, जेएनएन। हाईकोर्ट के निर्देश पर दर्ज अवैध खनन के केस में मंगलवार को सीबीआइ ने पूर्व बसपा एमएलसी हाजी मो. इकबाल, उनके भाई बसपा एमएलसी महमूद, साझीदार, रिश्तेदार व मुंशी के घरों पर छापेमारी की। इकबाल के न मिलने पर महमूद से घंटों पूछताछ की गई।

सुबह करीब आठ बजे सीबीआइ की तीन गाड़ियां चिलकाना रोड स्थित महावीर कॉलोनी पहुंचीं। यहां इकबाल के साझीदार अमित जैन उर्फ दादू की कोठी पर छापा मारा। टीम करीब डेढ़ घंटे तक अंदर रही। यहां से टीम मिर्जापुर में इकबाल की कोठी पर पहुंची। कुछ अफसर महमूद के घर चले गए। यहां महमूद से करीब ढाई-तीन घंटे तक पूछताछ की। इसके बाद टीम इकबाल के बेटे को साथ लेकर उनके गांव में ही रिश्तेदार दिलशाद के घर गई और वहां भी छानबीन की। यहां से इकबाल के मुंशी नसीम के घर पहुंची और तलाशी ली। सूत्र दावा कर रहे हैं कि टीम जिन दस्तावेजों की तलाश में यहां पहुंची थी वो नहीं मिले। करीब सवा 12 बजे सीबीआइ यहां से निकल कर पुन: अमित जैन के घर पहुंच गई। यहां फिर से घंटों तक तलाशी चली। शाम सात बजे टीम यहां से चली गई। बता दें कि 2012-16 के बीच सपा कार्यकाल के दौरान प्रदेश के सात जिलों में नियमों को ताक पर रखकर खनन पट्टे आवंटित करने की जांच सीबीआइ कर रही है। इनमें सहारनपुर भी शामिल है।

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सीबीआइ को कुछ नहीं मिला : एमएलसी

बसपा एमएलसी महमूद ने बताया कि खनन को लेकर साल 2012 में एक रिट हाईकोर्ट में दायर हुई थी, जिसमें यूपी के बांदा सहित चार जिले शामिल थे। अदालत ने मामले का संज्ञान लेकर जांच शुरू कर दी थी, लेकिन इसके बाद वर्ष 2015 में सीबीआइ ने इस जांच में सहारनपुर को भी शामिल कर लिया था। उसी रिट के क्रम में सीबीआइ की टीम मंगलवार सुबह यहां पहुंची थी। टीम ने उस समय के सभी खनन पट्टेदारों के यहां सर्च ऑपरेशन चलाया है, लेकिन यहां से इससे जुड़े कोई कागजात थे ही नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि टीम के अधिकारी उन्हें लिखकर दे गए हैं कि यहां से कुछ नहीं मिला।

Posted By: Jagran

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