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Asian Games 2026: सहारनपुर के गांव से अंतरराष्ट्रीय फलक तक यूं ही नहीं पहुंचीं प्राची, कड़े संघर्ष से भरी है कहानी

By Ajay Saxena Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 27 Sep 2026 05:40 AM (IST)

प्राची चौधरी ने 20वें एशियाई खेलों में 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर देश, प्रदेश और सहारनपुर का नाम ...और पढ़ें

प्राची चौधरी।

प्राची चौधरी।

HighLights

  1. प्राची चौधरी ने एशियाई खेलों में 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता।

  2. कड़े संघर्षों और अभावों के बावजूद प्राची ने यह बड़ी उपलब्धि पाई।

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। जापान में चल रहे 20वें एशियन गेम्स में सहारनपुर की बेटी ने एक बार फिर से इतिहास रचा है। भारतीय समय के अनुसार शनिवार शाम को हुई 400 मीटर की दौड़ में प्राची चौधरी ने तृतीय स्थान हासिल कर कांस्य पदक भारत को दिलाकर न केवल देश बल्कि प्रदेश व जिले को भी नाम रोशन किया है।

एशियाई खेल 2026 के सातवें दिन शनिवार को भारत को एथलेटिक्स में बड़ी खुशखबरी मिली। भारतीय स्टार धाविका विकास खंड सरसावा के गांव झबीरण निवासी प्राची चौधरी ने महिला 400 मीटर दौड़ के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया है।

एशियाड में प्राची ने 53.21 सेकेंड के समय के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। रेस के दौरान अंदरूनी लेन में दौड़ रही प्राची ने आखिरी 100 मीटर में गजब की रफ्तार दिखाई।

प्राची की जीत पर गांव में उत्साह का माहौल है और युवा खेल प्रेमी फूले नहीं समा रहे हैं। ढोल की थाप पर नाचते गाते खुशी मना रहे है। प्राची के पिता जयवीर सिह, माता राजेश देवी, चाचा सचिन कालियर, भाई अंकित, बहन अनु को गांव व क्षेत्र के लोग उपलब्धि पर बधाई दे रहे हैं। गांव तथा परिवार में उत्सव जैसा माहौल बना है।

कड़े संघर्ष के दौर से गुजरी है प्राची

सहारनपुर के छोटे से गांव झबीरन में 20 सितंबर 1996 में जन्मीं प्राची चौधरी की अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की कहानी संघर्षों से भरी है। अभावों के बीच भी प्राची ने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। प्राची के पास शुरुआत में अभ्यास करने के लिए कोई आधुनिक ट्रैक या मैदान नहीं था। वे अपने गांव में खेतों की मेड़ और कच्ची पगडंडियों पर दौड़कर अभ्यास करती थीं।

उनके पिता जयवीर सिंह एक साधारण किसान हैं, प्राची को एथलेटिक्स के खास जूते (स्पाइक्स) दिलाने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उस वक्त पैसे उधार लेकर बेटी को जूते दिलाए, ताकि वे अपना सपना पूरा कर सके।

कई बार आर्थिक तंगी के कारण प्राची को फटे हुए जूते पहनकर भी कड़ा अभ्यास करना पड़ा, लेकिन दौड़ना बंद नहीं किया। इससे पूर्व प्राची चौधरी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदक जीते हैं।