सहारनपुर, जेएनएन। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के प्रांतीय आह्वान पर चल रही हड़ताल गुरुवार को भी जारी रही। बात दें कि काम पर लौटने के नोटिस दिए जाने के बावजूद लेखपाल काम पर वापस नहीं लौटे थे, जिस पर जिला प्रशासन अब तक करीब 50 लेखपालों को निलंबित कर चुका है। बावजूद इसके लेखपाल अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के हकीकतनगर स्थित रामलीला मैदान में धरना दे रहे लेखपालों को संबोधित करते हुए संघ के जिलाध्यक्ष रामकिशन ने कहा कि लेखपाल संघ 10 दिसंबर से अपनी न्यायोचित मांगों के लिए आंदोलनरत हैं। लेखपालों की हड़ताल से सभी महत्वपूर्ण कार्य ठप होने के बावजूद सरकार लगातार इतने बड़े संवर्ग की अनदेखी कर रही है। विभिन्न प्रयासों के बावजूद सरकार प्रांतीय नेतृत्व को वार्ता के लिए नहीं बुला रही है। लेखपाल संवर्ग लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अपना शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब शासन स्तर पर पूर्व में हुई वार्ताओं में उनकी तर्कसंगत एवं उपयुक्त मांगों को माना जा चुका है तो फिर सरकार मांगों का संज्ञान क्यों नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि सरकार लेखपाल संघ को वार्ता के लिए बुलाए और संघ की समस्याओं का समाधान कराए।

लेखपालों की मुख्य मांगों में एसीपी विसंगति, वेतन उच्चीकरण, प्रोन्नति काडर रिव्यू, पेंशन विसंगति, भत्ते, लेखपाल का पदनाम परिवर्तन, इंटरनेट भत्ता 251 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध न कराए जाने के विरोध में लेखपाल संघ को हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा। बृहस्पतिवार को धरने की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष रामकिशन व संचालन जिला मंत्री राजेश कश्यप ने किया।

धरना प्रदर्शन में शाइस्ता राव, अश्विनी धामा, शेरसिंह, अंकुर चौधरी, अरविद त्यागी, प्रदीप शर्मा, मुकेश त्यागी, यशपाल सिंह, शेषराज तोमर, प्रदीप चौधरी, बिजेंद्र चौधरी, अनुपम चौहान, राजकुमार, अखिल, रवि, यज्ञपाल, कुंवरपाल, प्रवीण गर्ग, निर्मल गुप्ता, राजेश चौहान, रणसिंह पोसवाल, मुजम्मिल जमाल, गुफरान अहमद, फिरोज, नेहा गुप्ता, राखी वर्मा, स्वाति शर्मा, दीपिका, शीतल रानी, शबनम, पूनम पुंडीर, रिचा उपाध्याय, हिना, प्रियंका, रचिता जैन, लक्ष्मी नारायण आदि रहे। आंदोलन स्थगित किये जाने को एडीएम से मिले

उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष रामकिशन के नेतृत्व में गुरुवार को पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन एसबी सिंह से मिलकर ज्ञापन दिया, जिसमें कहा गया कि बुधवार को जनपद के लेखपाल संघ के पदाधिकारियों की बैठक में सुझाव आमंत्रित किये गए। लेखपाल संघ के प्रांतीय नेतृत्व से मांग की गई कि प्रांतीय नेतृत्व को शासन स्तर पर वार्ता कर अब तक हुई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कर आंदोलन स्थगित कर देना चाहिए। कहा कि लेखपाल संघ के निर्णय के बाद लेखपाल जल्द ही काम पर लौट आएंगे।

Posted By: Jagran

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