सहारनपुर, जेएनएन। महानगर में मूलभूत सुविधाएं व विकास कराने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। प्रत्येक वर्ष विकास व जनसुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार से करोड़ों रुपये का बजट व ग्रांट आवंटित की जाती है, लेकिन नगर निगम अपनी आय बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रहा। बजट न होने के कारण निगम क्षेत्र में बड़ी आबादी अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यह है नगर निगम के प्रमुख कार्य

-आम जन को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना

-महानगर में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता

-पूरे निगम क्षेत्र में नियमित सफाई व्यवस्था

-कूड़ा उठान से लेकर कूड़ा प्रबंधन

-स्ट्रीट लाइटों की समुचित व्यवस्था

-अतिक्रमण वाले क्षेत्रों को कब्जा मुक्त कराना

-निगम क्षेत्र की सरकारी संपत्तियों की देखभाल और सुरक्षा

-सीवरेज सिस्टम की व्यवस्था कराना

-नई सड़कों-गलियों का निर्माण करना

-नाली और नालों का निर्माण

-पुरानी सड़कों की मरम्मत और पुन: निर्माण

-नगरीय क्षेत्र का सुंदरीकरण

-भूमिगत जलस्तर सुधार के कदम उठाना

-पर्यावरण सुरक्षा को उद्यान व पार्को को बढ़ावा और देखभाल

-डिवाइडर आदि का निर्माण कराकर यातायात व्यवस्थित करना

-छोटे पुल व पुलियाओं का निर्माण

-लोगों के जन्म-मृत्यु दर्ज कराकर प्रमाणपत्र जारी करना

-आवासीय व कमर्शियल भवनों का रिकार्ड रखना

-संक्रामक रोगों की रोकथाम

-जनसुविधा (शौचालयों व पेशाबघरों) का निर्माण व देखभाल

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तीन हजार से अधिक स्थायी व अस्थायी कर्मचारी

निगम के पास तीन हजार से अधिक कर्मचारियों का बड़ा अमला है, जिसमें बड़ी संख्या में संविदा व ठेके के कर्मचारी है। इसके बावजूद लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।

-1996 सफाईकर्मी स्वास्थ्य विभाग में है, जिसमें 465 स्थायी, 719 के करीब संविदा तथा बाकी ठेके के है।

-45 विद्युतकर्मी है जो सभी ठेके पर हैं।

-199 पंप आपरेटर जलकल विभाग में, जिसमें से 80 स्थायी हैं।

-40 कर्मचारी हैं टैक्स विभाग में, जिसमें कंप्यूटर आपरेटर को छोड़कर बाकी सभी स्थायी है। तकरीबन ऐसी ही स्थिति नजूल विभाग, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विभाग, उद्यान विभाग, लेखा विभाग तथा रिकार्ड विभाग की है।

-निगम में बाबुओं व अधिकारियों की भारी कमी है। बाबुओं के 65 पद है, लेकिन कुल 21 बाबू स्थायी है। कई विभाग तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संभाल रहे है।

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करोड़ों की सालाना आय व खर्च

वर्ष 2019-20 के आंकड़ों के अनुसार नगर निगम की वार्षिक आय 42630.00 लाख रुपये है। जिसमें गृह, जल व सीवर तथा प्रेक्षागृह से 74 लाख रुपये। इसके अलावा अटल अमृत सिटी योजना, स्वच्छ भारत योजना, स्मार्ट सिटी, 14वें वित्त आदि से दो अरब 28 करोड़ पैंसठ लाख रुपये मिलने हैं। राजस्व आय 13867.50 के सापेक्ष 12572.00 लाख व्यय हुआ है तथा कुल व्यय 35482.00 है। वर्ष 2021-22 का बजट प्रस्तावित है।

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भ्रष्ट नीतियों के चलते नहीं बढ़ पाती आय

वर्ष 2019-20 के आंकड़ों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र की अनुमानत: जनसंख्या 8.5 लाख है। आय का मुख्य जरिया हाउस, वाटर व सीवर टैक्स है, जिससे करीब 7600.00 करोड़ रुपये आय का लक्ष्य निर्धारित है। इसके अलावा वार्षिक पार्किंग, पशु मंडी, लाइसेंस, रेत बजरी पार्किंग, ठेके व मेला गुघाल से करोड़ों की आय होती है। इनमें राजनैतिक हस्तक्षेप व भ्रष्ट नीतियों के कारण निगम की आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही है। निगम क्षेत्र में आज मात्र एक लाख 93 हजार भवन दर्ज हैं, जिसमें कामर्शियल भवनों की संख्या करीब 1700 है। यह स्थिति तब है, जबकि रायवाला, पंजाबी मार्केट, नया बाजार, सर्राफा बाजार में दो हजार से अधिक कामर्शियल भवन व काम्प्लेक्स है। यही नहीं निगम गठन के दस वर्ष बाद भी आज तक करीब 220 नई कालोनियों तथा निगम में शामिल 32 गांवों के हजारों भवन निगम में दर्ज नहीं हो पाए हैं।

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नगर निगम में मेरे कार्यकाल में काफी सुधार हुआ है, निगम की आय में करीब 30 प्रतिशत बढोत्तरी हुई है और आय के स्रोतो का विस्तार किया गया है। मूलभूत सुविधाएं पहले की अपेक्षा काफी बढ़ी हैं। निगम क्षेत्र बढ़ने से कुछ समस्याएं है जिन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

संजीव वालिया, महापौर

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नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। छूटे भवनों से लेकर कमर्शियल भवनों को उचित टैक्स के दायरे में लाने के अलावा लाइसेंस व ठेका नीलामी से आय बढ़ी है। निगम लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरे इसके प्रयास किए जा रहे है।

ज्ञानेंद्र सिंह, नगर आयुक्त

Edited By: Jagran