सहारनपुर, जेएनएन। हम जैसा बोएंगे वैसा ही काटेंगे. यह कहावत खूब कही और सुनी जाती है। विविधता के सम्मान में भी यह कहावत सटीक साबित होती है। हमें सभी धर्मों का आदर करना चाहिए। तीज, त्योहारों पर परस्पर भावनाओं का ख्याल रखकर एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए इससे भाईचारा बढ़ेगा और देश मजबूत बनेगा। देश में हर चार कोस की बोली में विविधता लगती है, लोगों की वेशभूषा और खानपान में अंतर नजर आने लगते हैं।

पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, इन चारों कोनों के निवासियों की वेशभूषा, व्यक्तित्व, रंग, भाषा आदि वहां की भौगोलिक स्थिति और परिवेश के अनुसार निर्धारित होती है। विविधता में ही सौंदर्य है। कवि विनयचंद्र मौदगल्य ने अपनी कविता में भारत की विविधता का बहुत सुंदर और मनोरम वर्णन किया है- हिद देश के निवासी सभी जन एक हैं, रंग-रूप, वेशभूषा चाहे अनेक हैं। मसलन गोरा रंग अच्छा है, तो काला रंग बुरा। गहनता से सोचा जाए, तो यह बात सामने आती है कि ये बात एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलती हैं। स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ सिद्ध करने की भावना दूसरों की कमी का मखौल उड़ाने से नहीं चूकती। नागरिकों का अलग-अलग स्वरूप पूरे देश को पूर्णता प्रदान करता है, मधुर संगीत की तान छेड़ता है यदि संगीत में एक ही सुर होता, तो संगीत का आनंद कहां रह जाता?

हम बेहद सौभाग्यशाली हैं, जो भिन्न-भिन्न ऋतुओं, मौसमों, खानपान और एक-दूसरे की संस्कृति को देखते हैं। इनका आनंद उठाते हैं। हमें इन विविधताओं का सम्मान करना चाहिए, हम सभी पहले भारतीय हैं। बाद में कुछ और। यही हमारी विविधता में एकता है, जब हमारे खिलाड़ी विदेश में खेलने जाते हैं, तो पूर्व से लेकर पश्चिम तक, उत्तर से लेकर दक्षिण तक सारा भारत एक सूत्र में बंध जाता है। कर्णम मल्लेश्वरी आंध्र प्रदेश की हैं, तो मेरी कॉम मणिपुर की और गीता फोगाट हरियाणा की, जब ये तीनों भारत के लिए खेलती हैं तो इनकी विविधता अथवा राज्य बाद में ध्यान आता है। यही छवि हम सभी को प्रत्येक भारतीय में हर रोज देखनी चाहिए। यदि ऐसा शीघ्र हो जाए, तो वह दिन दूर नहीं जब सभी लोग इस विविधता का हृदय से सम्मान करेंगे और देश को प्रगति पथ पर बढ़ाने के लिए मिलकर तत्पर होंगे। यहां के लोग बिना किसी धर्म के लोगों को हानि पहुंचाए बेहद शांतिपूर्ण तरीके से लोग अपने त्योहार मनाते है। होली, दीवाली, ईद, क्रिसमस, गुड फ्राइडे, महावीर जयंती, बुद्ध जयंती आदि कार्यक्रमों में हर धर्म के लोग शामिल होकर खुशियां साझा करते है। भारतमाता को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए देश के सभी धर्म के लोगों ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। देश में हिदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, पारसी समेत विविध धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। सभी अपने मत के अनुसार तीज त्योहार मनाते हैं। देश की बात आने पर सभी एक हो जाते हैं। हम कह सकते हैं कि भारत एक माला की तरह है, जिसमें विविध धर्म, जाति, समुदाय, रंग, रूप के लोगों के मोती पिरोए गए हैं। माला में संपर्क में रहने तक मोती का बड़ा महत्व रहता है। विविधता में एकता को मजबूत बनाकर देश को फिर से विश्वगुरु बनाने का संकल्प लेना चाहिए।

फादर थारसिस, प्रधानाचार्य सेंट मेरीज एकेडमी सहारनपुर।

Posted By: Jagran

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