सहारनपुर : सूचना के अधिकार से संबंधित अधिकारियों के समक्ष आने वाली कठिनाइयों के मद्देनजर जनपद के सूचना अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने कहा कि हर हाल में 30 दिन के अंदर सूचना दिया जाना अनिवार्य है। कहा कि यदि 500 शब्दों से ज्यादा का प्रार्थना पत्र है तो उसे निरस्त किया जा सकता है।

राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान बुधवार को सर्किट हाउस में जनपद के सूचना अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहे थे। इसके उपरांत मीडिया से बात करते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि आज के प्रशिक्षण शिविर के कन्वीनर कमिश्नर सीपी त्रिपाठी थे। इनकी देखरेख में डीआइजी शरद सचान, सीडीओ रेनू तिवारी, अपर आयुक्त आभा गुप्ता और अपर जिलाधिकारी एसके दूबे आदि रहे। कहा कि प्रशिक्षण में सूचना से संबंधित जो कठिनाइयां अधिकारियों के समक्ष आ रही हैं, उनका निस्तारण कर जानकारी दी गई। एक्ट के अनुसार 30 दिन के अंदर सूचना दिया जाना अनिवार्य है। यदि पांच सौ शब्दों से ज्यादा के प्रार्थना पत्र सूचना के लिए आते हैं तो उन्हें निरस्त किया जा सकता है। इसलिए कोशिश यही होनी चाहिए कि सूचना वही, मांगी जाए जिसकी आवश्यकता है। यदि किसी ने सूचना मांगी है और उसका जवाब नहीं आया है तो फिर कमिश्नर के अपील की जा सकती है, यदि फिर भी न मिले तो आयोग में जाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कमिश्नर स्तर पर ज्यादा से ज्यादा प्रार्थना पत्रों को निस्तारण हो जाए, ऐसे प्रयास किये जाए। एक सवाल के जवाब में कहा कि यदि कोई सूचना किसी को ब्लैकमेल करने के लिए मांगी जा रही है और यह बात साबित हो जाती है तो मांगने वाले के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करा कार्रवाई की जाएगी। बताया कि आयोग में हर रोज 15-17 हजार प्रार्थना पत्र आते हैं। डेढ़ लाख से अधिक प्रार्थना पत्रों का निस्तारण हो चुका है, 37 हजार प्रार्थना पत्र अभी भी लंबित हैं। इसी लिए इस प्रशिक्षण की आवश्यकता महसूस हुई थी।

Posted By: Jagran