सहारनपुर जेएनएन। देवबंद से शहर की ओर आ रहे हैं तो सजग हो जाइए। यहां हाईवे पर बने कट, पुल की ढाल, अगल-बगल से छू कर निकल जाने वाले हैवी वाहनों के साथ न जाने कब कौन मवेशी सामने आ धमके। हाईवे पर कोहरे के दौरान ये जीवन के लिए घातक हो सकते हैं। इसी तरह गंगोह, नकुड़ से लेकर सरसावा व बेहट तथा आबादी वाले क्षेत्र में मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। कोहरे की चादर के बीच यह वाहनों के लिए खतरनाक बन जाते हैं।

हाईवे के सुहाने सफर में सहारनपुर गागलहेड़ी, दिल्ली रोड तथा देहरादून हाईवे पर कई ब्लैक स्पॉट हैं। यहां हर दिन कोई न कोई हादसा होता रहता है। प्रशासनिक अफसरों के साथ ही पुलिस ने भी अपनी सहूलियत के लिए कई जगह अवैध कट बना रखा है। खासकर देवबंद में साखन नहर, बिहारीगढ़ में मोहंड से पहले, नकुड़ में फंदपुरी से पहले ऐसे प्वाइंट हैं, जहां न चाहते हुए भी वाहन आपस में भिड़ जाते हैं और किसी न किसी की जान चली जाती है।

---

जल्दबाजी में हादसों को आमंत्रण

अंबाला रोड व देहरादून रोड पर अवैध कट होने के कारण लोग शॉर्टकट रास्ता अपना कर हादसे को दावत देते हैं। अधिक दूरी को कम समय में पा लेने की चाहत में लोग वाहनों की चपेट में आ जाते हैं।

---

यह हैं हादसों की बड़ी वजह

सड़क पर यमराज की शक्ल वाले मालवाहक वाहन बिना फिटनेस के ही दौड़ रहे हैं। स्थिति ऐसी है कि हाईवे पर चलने वाले इन वाहनों को जिन जरूरी चीजों को पूर्ण कर चलना चाहिए, यह उसे भी पूरा नहीं करते। मसलन हेड लाइट, बैक लाइट, फॉग लाइट ढूंढ़ने से भी नहीं मिलते। रिफलेक्टर भी किसी-किसी वाहन में मिलता है।

-----

सरियो से लदे ट्राला भी बनते हैं हादसों का सबब

परिवहन विभाग तो मानों आंख मूंद कर बैठा है। वह मान चुके हैं कि सड़क पर यदि कुछ भी गलत-सही होना है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस के यातायात विभाग की है। मगर असल में ऐसा कर परिवहन विभाग अपनी जिम्मेदारी बचता है। मालवाहक वाहनों को बिना किसी दस्तावेजों को चैक करे ही फिटनेस सर्टिफिकेट सौंप दिया जाता है। ऐसे में नियमों की सबसे ज्यादा धज्जियां ऐसे ट्राले उड़ाते हैं, जो सरियो को लाद कर सड़क पर बेरोकटोक चलते हैं। ऐसे में कई बार बड़े हादसे भी हो जाते हैं। ऐसे ही टैंपो के ऊपर लंबे-लंबे पाइप को लाद कर भी सड़क पर आसानी से देखा जा सकता है, जो कभी भी साथ चलने वाले वाहन चालकों पर गिर जाते हैं, जिससे हादसा हो जाता है। ---

इनका कहना है..

अवैध कट को बंद करवाया जाएगा, क्योंकि कोई भी शॉर्टकट मानवजीवन से महत्वपूर्ण नहीं है। लोगों को भी चाहिए कोहरे में संभल कर व धीरे चलें ताकि अपने साथ-साथ सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों को भी सुरक्षित सफर दे सकें।

-दिनेश कुमार पी, एसएसपी।

--इनसेट----- कोहरा---सी-114,115, कोहरे ने थामे पहिये तो ठहर गई जिदगी

संसू, तीतरो: दिन निकलने से पूर्व छाए गहरे कोहरे ने वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिए। स्कूली बच्चों को भी कड़कड़ाती ठंड में कांपते हुए अपने शैक्षिक संस्थाओ में जाना पड़ा।

गुरुवार की सुबह अचानक मौसम में बढ़ी ठंडक ने जनता की दैनिक दिनचर्या पर खासा असर डाला। सुबह के समय लगभग 4 बजे आये घने कोहरे ने दृश्यता इतनी कम कर दी कि सड़कों पर मजबूरी वश निकले वाहन रेंगते रहे। धुंध इतनी अधिक थी कि बिना वाहनों की लाइट जलाए सामने के 100 मी.तक भी दिखाई देना मुश्किल हो रहा था। सबसे अधिक परेशानी स्कूलों बच्चों को उनके शिक्षण संस्थानों में लेकर जाने वाले वाहन चालकों को हुई, क्योकि समय पर बच्चों को स्कूल पहुंचाना उनकी बाध्यता थी। तीतरों -जलालाबाद मार्ग पर चलने वाले वाहन चालकों को जब कुछ दिखाई नहीं दिया, तो वे घंटों वाहनों को सड़क के किनारे सुरक्षित खड़ा करने के बाद कोहरा छटने पर गए। सुबह लगभग साढ़े नो बजे जब सूर्य देव ने जब अपने दर्शन दिए तो कोहरा कम हुआ। स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं के परिजनों ने प्रशासन से बढ़ती ठंड को देखते हुए स्कूली समय में बदलाव किये जाने की मांग की है। नागरिक श्याम बिहारी, नवनीत, विनीत गर्ग, गिरिराज आदि ने कहा कि प्रतिदिन मौसम में ठंड बढ़ रही है, जो बच्चो के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल सकती है, इसलिये प्रशासन को स्कूलों के समय में परिवर्तन करना चाहिए।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस