सहारनपुर 17 करोड़ की नकली करेंसी कांड का नेपाल कनेक्शन: आतंकी फंडिंग की आशंका, NIA की जांच तेज
सहारनपुर में 17.29 करोड़ रुपये की नकली करेंसी का मामला सामने आया है, जिसके तार नेपाल से जुड़े हैं और ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
सहारनपुर में 17.29 करोड़ की नकली करेंसी का खुलासा।
मामले के तार नेपाल से जुड़े, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जांच।
एनआईए जांच में आतंकी फंडिंग की आशंका, नेपाल से जुड़े तार।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। जिले से सामने आए 17 करोड़ 29 लाख रुपये की नकली करेंसी के मामले ने जांच एजेंसियों के साथ-साथ सुरक्षा तंत्र की भी चिंता बढ़ा दी है। इस पूरे प्रकरण के तार नेपाल तक जुड़ने की बात सामने आने के बाद नकली भारतीय मुद्रा के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच में नेपाल कनेक्शन सामने आने से यह भी आशंका गहराने लगी है कि नकली करेंसी को भारत में खपाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों का इस्तेमाल किया जा रहा था। वहीं एनआइए की नकली करेंसी मामले में सहारनपुर में आमद इस बात को पुष्ट कर रही है।
नेपाल पुलिस ने सहारनपुर में बीएएमएस की पढ़ाई करने वाले दो युवकों को किया था गिरफ्तार
17 करोड़ 29 लाख रुपये की नकली करेंसी से जुड़े मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसका कनेक्शन अब नेपाल से भी जुड़ने की बात सामने आ रही है। खास बात यह है कि नेपाल में 75 हजार रुपये की नकली भारतीय मुद्रा के साथ पकड़े गए दो युवकों का संबंध सहारनपुर से सामने आ चुका है। दोनों ग्लोकल यूनिवर्सिटी में बीएएमएस की पढ़ाई कर रहे थे और एक निजी अस्पताल में प्रैक्टिस भी करते थे। इनमें एक सिद्धार्थनगर निवासी अभिषेक कसौधन व महाराष्ट्र निवासी यश था।
जांच एजेंसियां इन दोनों के बारे में यह भी पता करने में जुटी है कि इन दोनों के बैंक खाते सहारनपुर में पीएनबी की किसी ब्रांच में तो नहीं थे। ग्लोकल यूनीवर्सिटी का नाम भी फंडिंग के मामले में खूब उछल चुका है।
नेपाल के रास्ते पहले भी भारत में पहुंचते रहे हैं पड़ोसी देशों से नकली नोट
सहारनपुर की भौगोलिक स्थिति भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह जिला कई प्रमुख शहरों और राज्यों से जुड़ा है, जिससे यहां से नकली मुद्रा को दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाने की संभावनाओं की जांच की जा रही है। नकली भारतीय मुद्रा के कारोबार ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती का नया रूप खड़ा कर दिया है। सहारनपुर में नकली करेंसी मामले में जांच के लिए पहुंची एनआईए की टीम के आने के बाद यह बात पुख्ता हो रही है।
नकली भारतीय मुद्रा को देश में भेजने के लिए लंबे समय से चल रहा है नेटवर्क
नकली भारतीय मुद्रा को देश में पहुंचाने के लिए सीमापार नेटवर्क लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। पहले जहां आतंकी नेटवर्क और संगठित गिरोह नकली करेंसी को भारत तक पहुंचाने के लिए सीमापार अपने ओपन नेटवर्क और कैरियरों का इस्तेमाल करते थे, वहीं अब बैंकिंग चैनल का दुरुपयोग कर नकली मुद्रा को अर्थव्यवस्था में खपाने की कोशिश की जा सकती है।
कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठ रहे
सहारनपुर में सामने आए इस मामले ने नकली करेंसी के नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ नेपाल कनेक्शन की पड़ताल चल रही है तो दूसरी ओर संदिग्ध लोगों के बैंकिंग और वित्तीय नेटवर्क की जांच का पहलू सामने आ रहा है।
आतंकियों को होती रही है फंडिंग
देशविरोधि गतिविधियों के लिए आतंकियों को पड़ोसी देश पाकिस्तान से फंडिंग होती रही है। पिछले दिनों सहारनपुर व देश के अलग-अलग शहरों में पकड़े गए सहारनपुर निवासी युवकों व लोगों के आतंकियों से संबंध सामने आ चुके हैं। यूपी एटीएफ के अलावा अन्य प्रदेशों की एटीएस की जांच में आतंकी फंडिंग के मामले सामने आए हैं।
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डॉ. अदिल की गिरफ्तारी में भी सामने आई थी फंडिंग
दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार बम धमाके के मामले में कश्मीर निवासी डा. अदिल अहमद राठर को साजिशकर्ता के रूप में गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों की जांच में सामने आया था कि
डा. अदिल को आतंकी फंडिंग हुई थी।
