सहारनपुर,जेएनएन। घुन्ना व नाजिरपुरा गांव में हुए बवाल के बाद दर्ज हुई एफआइआर के विरोध में मंगलवार को भीम आर्मी जिलाध्यक्ष सहित 176 लोग गिरफ्तारी देने के लिए जिला मुख्यालय पहुंचे। यहां मुस्तैद पुलिस-प्रशासन ने उन्हें बस में बैठाया और सभी को पुलिस लाइन मैदान ले गए। गिरफ्तारी देने वालों में भीम आर्मी के राष्ट्रीय महासचिव कमल वालिया की मां सहित 44 महिलाएं भी शामिल थीं। तहसीलदार को ज्ञापन दिलवाकर शाम को सभी को छोड़ दिया गया। वहीं, एक हफ्ते बाद भी बवाल के किसी आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हुई है। आंबेडकर प्रतिमा तोड़ने के आरोपित भी नहीं पकड़े गए हैं।

10 सितंबर को बेहट रोड स्थित घुन्ना गांव में बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को शरारती तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था। इससे गुस्साए घुन्ना व नाजिरपुरा के अनुसूचित जाति के लोगों ने बेहट रोड पर घंटों जाम लगाया था। पुलिसकर्मियों व शाकंभरी देवी जा रहे श्रद्धालुओं पर पथराव कर दिया था। पुलिस ने 104 को नामजद करते हुए कुल 700 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इसी के विरोध में भीम आर्मी ने एलान किया था कि आरोपितों के परिजनों के साथ मंगलवार को वह सामूहिक गिरफ्तारी देंगे। इसको देखते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। रामनगर, घुन्ना व नाजिरपुरा सहित अनुसूचित जाति बाहुल्य गांवों के बाहर ही गिरफ्तारी के लिए बसों को लगा दिया था। मंगलवार सुबह साढ़े 11 बजे जिलाध्यक्ष रोहितराज गौतम के नेतृत्व में करीब 100 लोग गिरफ्तारी देने के लिए कलक्ट्रेट गेट पर पहुंचे। एसपी सिटी ने सभी को बस में बैठाया और पुलिस लाइन मैदान में भिजवा दिया। बाद में इन्हें शांतिभंग व धारा 144 के उल्लंघन के तहत कार्रवाई करते हुए निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।

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इनका कहना है..

घुन्ना प्रकरण में दर्ज हुई एफआइआर का विरोध करने के लिए एक संगठन से जुड़े कुछ लोग गिरफ्तारी देने पहुंचे थे। सभी को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन में रखा, जहां से निजी मुचलके पर उन्हें छोड़ दिया है। सुरक्षा के लिहाज से जगह-जगह पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है।

- दिनेश कुमार पी, एसएसपी।

Posted By: Jagran

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