सहारनपुर: समय से इंद्रदेव मेहरबान हुए। झमाझम बारिश से हालांकि जानमाल से सबका नुकसान हुआ, लेकिन धान की फसल के लिए अच्छी बारिश हुई है। रोपाई समय से होने के नाते कृषि विज्ञानियों का मानना है कि इस बार धान की खुशबू चौतरफा फैलेगी। धान की अच्छी पैदावार होने की संभावना प्रबल हो गई है।

जिले में धान की पैदावार का मुख्य केंद्र तराई वाले क्षेत्र हैं। इसमें यमुना से लगते बेहट, सरसावा, नकुड़ व गंगोह मुख्य रूप से उपजाऊ होते हैं, मगर कई बार यमुना में पानी अधिक आ जाने के कारण धान की फसल बर्बाद भी हो जाती है, लेकिन इस साल जिले में धान की रोपाई से पहले और बाद में जिस तरह से बारिश हो रही है उसे देख अधिकांश किसानों ने धान को तवज्जो दी है। किसानों को उम्मीद है कि इस साल धान का दाम भी अच्छा रहेगा। यही कारण है कि बासमती धान अधिक लगाया गया है। यूं तो जिले का किसान हमेशा से ही गन्ने को प्राथमिकता पर रखता है। गत वर्ष जनपद में धान का औसत उत्पादन प्रति हेक्टेयर 26.17 कुंतल रहा था। इसे देखते हुए ही इस बार यह लक्ष्य 27.38 कुंतल प्रति हेक्टेयर रखा गया है। किसानों के रुख को देखकर ही शासन से लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। गत वर्ष जनपद में धान का उत्पादन 141.428 मीट्रिक टन रहा था। इसे देखते हुए ही इस बार धान का लक्ष्य 150.77 मीट्रिक टन रखा गया है।

विगत वर्षों में यह रही स्थिति

मगर पिछले कई वर्षों से किसान गन्ने के साथ-साथ धान को भी बढ़ावा दे रहे हैं। यही कारण है कि जिले में धान का रकबा 50-55 हजार हेक्टेयर के बीच चला आ रहा है। वर्ष 2010 में किसानों ने 58 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई की थी। वर्ष 2011 में 55 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई थी। वर्ष 2012 में 51 हजार हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई की गई थी। इस साल 55 हजार 58 हेक्टेयर रकबे में धान की रोपाई का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक 50 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूभाग पर धान की रोपाई की जा चुकी है। कृषि वैज्ञानिक डा. आइके कुशवाहा का कहना है कि यदि किसान अभी से धान फसल की सुरक्षा के उपाय करेंगे तो इस बार अच्छी फसल होगी।

जिले में धान पूर्ति हेक्टेयर

धान नर्सरी -3725

धान सुगंधित- 31050

धान शंकर -3690

धान अन्य - 14976

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