जागरण संवाददाता, रामपुर : रसोई गैस सिलेंडर के इस्तेमाल में लापरवाही से अक्सर हादसे होते हैं। कई बार ये हादसे लोगों की जान और माल का नुकसान कर देते हैं। बावजूद लोग इन हादसों के बाद से सबक नहीं लेते। एक दिन पहले ही एटा में ऐसा हादसा हुआ, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई और जिस घर में हादसा हुआ, वहां सिलेंडर फटने से पूरा घर रेत की तरह भरभराकर गिर गया। आजकल सभी घरों में सिलेंडर के रूप में लाल बम हमारी रसोईघरों में मौजूद है। इसके इस्तेमाल में लापरवाही जानलेवा हो सकती है। ऐसे में जरूरी है सुरक्षा मानकों की जानकारी होना। क्या है सुरक्षा मानक

गैस सिलेंडर इस्तेमाल करने वालों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि कहीं उनके घर में एक्सपायरी डेट का गैस सिलेंडर तो नहीं है। अक्सर हादसे ऐसे ही सिलेंडर के साथ होते हैं, जो एक्सपायर हो चुके होते हैं। वैसे तो पेट्रोलियम कंपनियां सुरक्षा की ²ष्टि से हर सिलेंडर की एक्सपायरी डेट तय करती हैं। डेट पूरी होने के बाद सुरक्षा मानकों को चेक करने के बाद कंपनियां फिर से एक्सपायरी डेट बढ़ाती हैं, लेकिन कई बार कालाबाजारी के चक्कर में कुछ सिलेंडर सुरक्षा चेक से बच जाते हैं और गलती से आपके घर पहुंच जाते हैं। अगर आप अपने गैस सिलेंडर की एक्पायरी डेट चेक करना चाहते हैं तो ये बेहद आसान है। सिलेंडर पर ए, बी, सी, डी और उसके आगे कुछ नंबर लिखे होते हैं। ए का मतलब है जनवरी से मार्च। बी यानी अप्रैल से जून। सी का अर्थ है जुलाई से सितंबर और डी अक्टूबर से दिसंबर। इसके आगे लिखे अंकों का संबंध एक्सपायरी महीने के खत्म होने वाले साल से होता है। उदाहरण के लिए सिलेंडर पर अगर ए-24 लिखा है तो इसका मतलब सिलेंडर की एक्सपायरी डेट साल 2024 में जनवरी से मार्च के बीच है। अगर सिलेंर पर बी-20 लिखा है तो इसका मतलब है कि 2020 में अप्रैल से जून के बीच सिलेंडर एक्सपायर हो रहा है। अब आगे से सिलेंडर लेते समय उसकी एक्सपायरी डेट जरूर चेक कर लें। अगर सिलेंडर की एक्सपायरी डेट निकल चुकी है तो उसे फौरन वापस कर दें, वर्ना ये खतरनाक हो सकता है।

रसोई गैस इस्तेमाल करते समय बरतें ये सावधानियां 1. गैस सिलेंडर को हमेशा सीधा रखें। आड़ा या तिरछा कभी न रखें।

2. गैस चूल्हा हमेशा सिलेंडर से कम से कम छह इंच ऊपर किसी समतल जगह पर रखें।

3. खाना हमेशा खड़े होकर ही बनाएं।

4. चूल्हे को ऐसे स्थान पर रखें, जहां बाहर से सीधी हवा न लगे।

5. रसोई में गैस सिलेंडर के अलावा कोई ज्वलनशील पदार्थ मिट्टी तेल, पेट्रोल आदि न रखें।

6. चूल्हा जलाते समय पहले माचिस की तीली जलाएं, उसके बाद गैस ऑन करें।

7. भोजन बनाते समय कोई अन्य कार्य न करें, बल्कि चूल्हे के पास मौजूद रहें।

8. सूती कपड़े पहनकर या एप्रेन पहनकर ही खाना बनाएं।

9. गैस की गंध आने पर बिजली का स्विच, लाइटर, माचिस आदि न जलाएं और सभी खिड़की दरवाजे खोल दें।

10. गैस लीक होने पर रेग्यूलेटर को हटाकर सेफ्टी कैप लगा दें और उसे सिलेंडर को खुले में रखकर वितरक को सूचना दें। क्या कहते हैं गैस वितरक

पेट्रोलियम कंपनी हर पांच साल में गैस एजेंसियों के कर्मचारियों के माध्यम से सर्वे कराती है। इस दौरान कर्मचारी घर-घर जाकर रसोई गैस की जांच करते हैं। रेग्यूलेटर खराब या पाइप कटा फटा होने पर उसे बदलते हैं। इसके लिए कंपनी कुछ फीस लेती है। कई बार लोग फीस न देने के चक्कर में जांच नहीं कराते हैं, जो खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा लोग सस्ते के चक्कर में घटिया सफेद पाइप लगा देते हैं। हमेशा आइएसआइ मार्क वाला पाइप लगाएं। यह पाइप फायर प्रूफ होता है और चूहे इसे नहीं काट सकते हैं।

राजेंद्र प्रसाद, अध्यक्ष रामपुर एलपीजी एसोसिएशन। सिलेंडर की डिलीवरी लेते समय उपभोक्ता लीकेज की जांच जरूर कर लें। इसके लिए सेफ्टी कैप हटाकर पानी डालकर देखें। लीकेज होने पर बुलबुले निकलें तो सिलेंडर वापस कर दें। रेग्यूलेटर बॉल के अंदर की रबड़ कटी होने पर उसे इस्तेमाल न करें। तुरंत बदल लें। सिलेंडर की एक्सपायरी डेट भी जरूर चेक करें। इसके अलावा रसोई गैस रिसाव या अन्य किसी भी तरह की समस्या होने पर वितरक को सूचित करें या फिर हेल्प लाइन नंबर 1906 पर संपर्क करें।

शरद मोहन गुप्ता, बिलासपुर गैस सर्विस एजेंसी। रसोई गैस का कनेक्शन लेने के साथ ही उपभोक्ता का थर्ड पार्टी बीमा हो जाता है। पेट्रोलियम कंपनियां रसोई गैस उपभोक्ताओं को बीमे की सुविधा भी देती है। हादसा होने पर उपभोक्ता क्लेम कर सकता है। हालांकि क्लेम करने पर बीमा कंपनी के सर्वेयर आकर जांच करते हैं। जांच के दौरान देखा जाता है कि उपभोक्ता ने सभी सुरक्षा मानक का पालन किया था या नहीं। क्लेम तब ही मिल सकता है, जब आपने कंपनी द्वारा पांच साल में की जाने वाली जांच कराई होगी।

सत्य प्रकाश अग्रवाल, मैनेजर प्रगति फ्लैम। अवैध रूप गैस रीफिलिग करने वाले भी कसा जाए शिकंजा

रामपुर : जिले में अवैध रूप से गैस रिफिलिग का धंधा चल रहा है। बाजारों, गलियों और घरों से लोग इस काम को कर रहे हैं। इनके खिलाफ प्रशासन अभियान नहीं चलाता है, जिससे ये लोग बेखौफ होकर इस धंधे को चला रहे हैं। शहर के बाजारों और गलियों में ऐसी कई दुकानें हैं, जहां दुकान के अंदर बड़े गैस सिलेंडर से छोटे सिलेंडर में असुरक्षित तरीके से गैस रीफिलिग की जाती है। इस गोरखधंधे के पीछे प्रशासन की लापरवाही तो है ही साथ ही अधिक मुनाफे के चक्कर में एजेंसी संचालक से लेकर डिलीवरी ब्वाय तक की लंबी फौज है। गैस से भरा एक सिलेंडर मार्केट में एक हजार रुपये तक बेचा जाता है। इसे दुकानदार फुटकर में 80 रुपये से लेकर 100 रुपये तक में बेच देते हैं। प्रशासन को इन धंधेबाजों के खिलाफ सख्ती करनी होगी, वर्ना जरा सी लापरवाही किसी बड़े हादसे को अंजाम दे सकती है।

Posted By: Jagran

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