विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आजम खान ने जिसे कहा था 'तनखैया', उसी के हाथ अब जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों का भविष्य

Published: Tue, 21 Jul 2026 12:49 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 21 Jul 2026 06:14 PM (GMT+05:30)

आजम खान ने जिस अफसर को 'तनखैया' कहा था, आज जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों का भविष्य उसी के हाथों में है।

सपा नेता आजम खान।

सपा नेता आजम खान।

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, रामपुर। सपा महासचिव आजम खान ने 2019 के लोकसभा चुनाव में जिस IAS अफसर आंजनेय कुमार सिंह को तनखैया (तनख्वाह पर काम करने वाला) कहते हुए उनके खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की थी। फिलहाल जौहर विश्वविद्यालय का भविष्य उन्हीं के भरोसे पर है।

रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के विश्वविद्यालय के 40 में से 38 अवैध भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश के खिलाफ मंडलायुक्त के न्यायालय में अपील दायर की गई है। 28 जुलाई को इस पर सुनवाई होगी।

आजम को तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह (अब कमिश्नर) के खिलाफ टिप्पणी करने के मामले में दो साल की सजा हो चुकी है। आरडीए उपाध्यक्ष व डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों के बिना मानचित्र के बनाए जाने पर उन्हें ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था।

विवि प्रबंधन के पास सिर्फ 20 दिन का समय

इसके लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन को खुद ध्वस्त करने के लिए 20 दिन का समय दिया है। इसके बाद आरडीए खुद कार्रवाई करेगा और खर्चा विश्वविद्यालय प्रबंधन से वसूलेगा।

सोमवार को विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता जुनैद एजाज ने मंडलायुक्त के न्यायालय में ध्वस्तीकरण के आदेश के खिलाफ अपील दायर की। 15 पेज की अपील में तर्क है कि विश्वविद्यालय का क्षेत्र ग्राम सींगनखेड़ा भवन निर्माण के समय क्षेत्र ग्राम पंचायत के अधीन था।

Jauhar-University-1784110925170-1784502066278

2018 में विवि के भवन बन चुके थे

उस समय उत्तर प्रदेश जिला पंचायत एवं क्षेत्र पंचायत अधिनियम, 1961 लागू था। क्षेत्र पंचायत से अनुमति का प्रविधान था, अनुमति न लेने पर अधिकतम 500 रुपये जुर्माने का प्रविधान था।

आरडीए का गठन 27 सितंबर, 2024 को हुआ, जबकि विश्वविद्यालय के भवन 2018 में ही बन चुके थे। बाद में गठित प्राधिकरण पूर्व निर्मित भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं कर सकता।

भूमि उपयोग का तर्क आरडीए के नोटिस में स्वयं भूमि को शैक्षिक गतिविधियों के लिए चिन्हित बताया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में केवल शैक्षिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसलिए भूमि उपयोग के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई उचित नहीं है।

हाई कोर्ट का भी विकल्प

सपा विधि प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अधिवक्ता कासिफ खान ने बताया कि मंडलायुक्त के न्यायालय में दाखिल की गई अपील पर सुनवाई के बाद अगर आरडीए का आदेश निरस्त कर दिया जाता है, तब ये प्रकरण यहीं समाप्त हो जाएगा।

अगर न्यायालय संतुष्ट नहीं होता है और आरडीए के आदेश को सही ठहराता है तो उच्च न्यायालय में आदेश के खिलाफ अपील करने का विकल्प है।

यह भी पढ़ें- '38 इमारतें गिराईं तो छात्रों का क्या होगा?' जौहर यूनिवर्सिटी पर संसद में भड़के रामपुर सांसद नदवी