रामपुर, जेएनएन। राजस्व परिषद ने भी सपा सांसद की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका चकरोड, रास्ता, नदी और रेत की भूमि को नियम विरुद्ध तरीके से कब्जाने के संंबंध में थी। 

यह है पूरा मामला 

भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने शासन व प्रशासन में शिकायत कर कहा था कि सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहते आजम ने ग्राम सभा सींगनखेड़ा की चकरोड, कोसी नदी व रेत की भूमि को राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर जौहर यूनिवर्सिटी में मिला लिया था। जांच के बाद डीएम ने राजस्व परिषद, इलाहाबाद में दो नवंबर 2017 को चार वाद दायर कराए थे। तब सांसद ने यह कहकर आपत्ति लगाई थी कि वाद चलाने योग्य नहीं हैैं, इनकी दायर करने की समय सीमा निकल चुकी है। परिषद ने आपत्ति को दरकिनार करते हुए वाद चलाने की अनुमति दे दी थी। सांसद ने हाईकोर्ट जाकर प्रदेश सरकार के साथ भाजपा नेता को भी प्रतिवादी बनाया था। हाईकोर्ट ने परिषद के वाद चलाने की अनुमति देने संबंधी आदेश को सही माना था। इधर, परिषद ने किसानों और नदी की जमीनों को जौहर ट्रस्ट के नाम किए जाने संबंधी सभी आदेशों को खारिज कर मंडलायुक्त को चार माह के अंदर किसानों को कब्जा दिलाने के आदेश दिए थे। जिला प्रशासन ने चकरोड खाली कराने के नोटिस जौहर ट्रस्ट को दिए। सांसद ने जौहर ट्रस्ट की ओर से पुनर्विचार याचिका राजस्व परिषद बोर्ड प्रयागराज में दाखिल की थी, जिसे परिषद ने खारिज कर दिया है। 

आजम खां को घोटाले पर जवाब देने के लिए 15 दिन की मोहलत

जौहर विश्वविद्यालय रामपुर के कुलाधिपति सांसद आजम खां पर करोड़ों की संपत्ति का घोटाला करने का आरोप लगाकर उसकी जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर कोर्ट ने जवाब के लिए 15 दिन का समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विश्वनाथ सोमद्दर व न्यायमूर्ति डॉ. वाईके श्रीवास्तव की पीठ ने रामपुर के फैसल खां लाला की जनहित याचिका पर दिया है। 

कोर्ट ने मामले में इसके पूर्व भी 22 जनवरी को जवाब दाखिल करने का समय दिया था। उसके अनुक्रम में बुधवार को सरकारी वकील ने मामले में अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा मौखिक रूप से प्रस्तुत किया। कोर्ट ने इसे 15 दिन के भीतर शपथपत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिका में आजम खां पर जौहर विश्वविद्यालय व जौहर ट्रस्ट बनाकर करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति का घोटाला करने का आरोप लगाते हुए सीबीआइ जांच की मांग की गई है। याची के अधिवक्ता का तर्क है कि सांसद आजम खां ने जौहर विश्वविद्यालय के नाम से प्राइवेट विश्वविद्यालय बनाया है। उन्होंने इस विश्वविद्यालय के लिए विभिन्न विभागों व सरकार की लगभग 88 करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, जिसकी जांच होनी चाहिए। 

 

Posted By: Narendra Kumar

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