यूपी के इन सरकारी स्कूलों में अब हादसों से पहले तलाशा जाएगा खतरा, ढीली पड़ी व्यवस्था तो होगी बड़ी कार्रवाई!
सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब स्कूल सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। इस ऑडिट में भवन, ...और पढ़ें

उच्च प्राथमिक विद्यालय नानकार का भवन। जागरण आर्काइव
HighLights
पहचान पत्र के बिना टीम को स्कूलों में नहीं मिलेगा प्रवेश
सेफ्टी आडिट में भवन, बिजली, अग्नि सुरक्षा और निकासी व्यवस्था की होगी जांच
संवाद सहयोगी, रामपुर। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था अब जांच के दायरे में होगी। परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में स्कूल सेफ्टी आडिट कराया जाएगा।
ऑडिट में भवन की मजबूती, बिजली, अग्नि सुरक्षा, पेयजल-स्वच्छता, आपात निकास, सुरक्षित निकासी और खेल मैदान समेत बच्चों की सुरक्षा से जुड़े हर संभावित जोखिम को परखा जाएगा। सुरक्षा में कमी मिलने पर उसे चिन्हित कर सुधार कराया जाएगा।

शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग का विद्यालय स्तर पर सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। प्रधानाध्यापकों को टीम को आवश्यक अभिलेख और विद्यालय से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
आडिट का उद्देश्य केवल कमियां गिनना नहीं, बल्कि हादसे की वजह बन सकने वाले जोखिमों को समय रहते सामने लाना है। कमजोर भवन, असुरक्षित विद्युत व्यवस्था, आग से बचाव के इंतजामों की कमी अथवा आपात स्थिति में बाहर निकलने में बाधा जैसी कमियां मिलने पर उनके निराकरण की कार्रवाई की जा सकेगी।

बीएसए कल्पना देवी ने कहा कि विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी प्रधानाध्यापकों को अधिकृत पहचान पत्र का सत्यापन करने और ऑडिट टीम को आवश्यक सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं।
पहचान पत्र के बिना टीम को स्कूल में प्रवेश नहीं
आडिट के लिए आने वाली टीम के सदस्यों को कार्यदायी संस्था अधिकृत पहचान पत्र देगी। प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापक पहचान पत्र देखकर उसका सत्यापन करेंगे, इसके बाद ही आडिट शुरू कराया जाएगा। बिना अधिकृत पहचान पत्र किसी व्यक्ति को स्कूल सेफ्टी आडिट की अनुमति नहीं होगी।
क्या है स्कूल सेफ्टी आडिट
विद्यालय में बच्चों के लिए संभावित खतरों की व्यवस्थित जांच को स्कूल सेफ्टी आडिट कहा जाता है। इसमें भवन, बिजली, आग से बचाव, पेयजल, स्वच्छता और आपात निकासी जैसी व्यवस्थाओं को परखा जाता है।
सुरक्षा की कमियां समय रहते सामने आने से उन्हें दूर कराया जा सकेगा। इससे दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने और आग या अन्य आपात स्थिति में बच्चों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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