रामपुर में तीन दिवसीय विराट किसान मेला का होगा आयोजन, जुटेंगे आठ जिलों के प्रगतिशील लोग
रामपुर के पनवड़िया में 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक तीन दिवसीय विराट किसान मेला आयोजित होगा, जिसमें आधुनिक कृषि तकनीकें और सरकारी योजनाएं प्रदर्शित की जाएंगी।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
पनवड़िया, रामपुर में तीन दिवसीय विराट किसान मेला 29 सितंबर से।
मेले में आधुनिक कृषि तकनीकें, उपकरण, ड्रोन और सोलर पंप का प्रदर्शन।
आठ जिलों के किसान और विशेषज्ञ करेंगे कृषि संवाद, समस्याओं का समाधान।
जागरण संवाददाता, रामपुर। खेती में नई तकनीक अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का मौका किसानों को एक ही जगह मिलेगा। पनवड़िया स्थित सांस्कृतिक सद्भावना केंद्र में 29 सितंबर से एक अक्टूबर तक तीन दिवसीय विराट किसान मेला आयोजित किया जाएगा।
मेले में 60 से अधिक स्टालों पर आधुनिक खेती की तकनीक और कृषि उपकरणों का प्रदर्शन होगा। कृषि ड्रोन और सोलर पंप का सजीव प्रदर्शन भी किसानों को कराया जाएगा।
कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण एवं कृषक जागरूकता कार्यक्रम के तहत आयोजित मेले का संचालन प्रतिदिन सुबह 10 बजे से होगा। उप कृषि निदेशक राम किशन सिंह ने किसानों से अधिक संख्या में मेले में पहुंचकर आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की सलाह का लाभ लेने की अपील की है।
उन्होंने बताया कि इसमें कृषि, उद्यान, गन्ना, पशुपालन, मत्स्य, रेशम, सहकारिता, सिंचाई, लघु सिंचाई, विद्युत और दुग्ध विकास समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी किसानों को योजनाओं, अनुदान और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देंगे। बैंकर्स, एनजीओ, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे।
स्टालों पर तकनीक, खेत में इस्तेमाल का तरीका भी दिखेगा
मेले में उन्नत कृषि तकनीक, कृषि यंत्र, कृषि ड्रोन, सोलर पंप, प्राकृतिक खेती, उर्वरक, बीज और कृषि रक्षा रसायनों से संबंधित स्टाल लगाए जाएंगे। किसानों को उपकरणों की जानकारी देने के साथ ड्रोन और सोलर पंप का सजीव प्रदर्शन कर उनके व्यावहारिक इस्तेमाल को भी समझाया जाएगा।
आठ जिलों के किसान साझा करेंगे खेती के प्रयोग
सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, मुरादाबाद, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच और श्रावस्ती के प्रगतिशील एवं एचीवर किसान मेले में शामिल होंगे। इससे किसानों को अलग-अलग क्षेत्रों में अपनाई जा रही सफल कृषि तकनीकों और प्रयोगों की जानकारी मिल सकेगी।
मेले में कृषक-वैज्ञानिक संवाद भी होगा। किसान फसल उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य, प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती, कीट-रोग प्रबंधन और जल संरक्षण से जुड़ी समस्याएं सीधे वैज्ञानिकों के सामने रख सकेंगे। विशेषज्ञ मौके पर उनके सवालों का तकनीकी और व्यावहारिक समाधान बताएंगे।
