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अब सिर्फ हेडमास्टर नहीं, स्कूल के ‘लीडर’ बनेंगे प्रधानाध्यापक, NEP के आधार पर सिखाए जाएंगे प्रबंधन के गुर

Published: Tue, 01 Sep 2026 05:05 PM (GMT+05:30)

रामपुर में 1665 प्रधानाध्यापकों को 'सक्षम माड्यूल' के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे केवल प्रशासक नहीं, बल्कि विद्यालय के शैक्षणिक नेता बन सकें।

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जागरण संवाददाता, रामपुर। परिषदीय विद्यालयों के साथ माध्यमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ अब विद्यालयों के नेतृत्व को भी मजबूत किया जाएगा। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए सक्षम हस्तपुस्तिका और प्रशिक्षण माड्यूल तैयार किया है। जिले में इसका सीधा लाभ 1665 परिषदीय व माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापकों व प्रधानाध्यापकों को मिलेगा।

जिले के एससीईआरटी में मास्टर ट्रेनरों ने प्रशिक्षण लेने के बाद जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान सोमवार से डायट के माध्यम से प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षित करना शुरु कर दिया गया। प्रशिक्षण मिलने के बाद प्रधानाध्यापक विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, शिक्षकों के मार्गदर्शन और बच्चों की अधिगम प्रगति पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे।

डायट प्रशिक्षण प्रभारी प्रवक्ता राजेश कुमार ने बताया कि सक्षम माड्यूल का उद्देश्य प्रधानाध्यापकों को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें विद्यालय का शैक्षणिक नेता, मार्गदर्शक, संरक्षक और समुदाय से जोड़ने वाले सेतु के रूप में विकसित करना है। वहीं संदर्भदाता डायट प्रवक्ता ब्रजराज किशोर ने बताया कि मानवीय एवं संवैधानिक मूल्यों पर आधारित प्रशिक्षण माड्यूल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और निपुण भारत मिशन की अवधारणा पर आधारित है।

प्रशिक्षण में प्रधानाध्यापकों को बच्चों की अधिगम उपलब्धि बढ़ाने, शिक्षकों के व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करने और विद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने के तरीके बताए जाएंगे।

इसके साथ शिक्षण योजना, विद्यार्थियों की प्रगति की समीक्षा, शिक्षकों के कार्य आवंटन और पर्यवेक्षण, विद्यालय प्रबंधन तथा प्रशासनिक दक्षता से जुड़े विषय भी शामिल होंगे।

समावेशी शिक्षा और तकनीक पर भी जोर

माड्यूल में सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विविधताओं के बीच सभी बच्चों को समान शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, समावेशी वातावरण तैयार करने, विद्यालय में सुरक्षित माहौल बनाने और अभिभावकों व समुदाय से बेहतर संवाद स्थापित करने के तरीके भी प्रशिक्षण का हिस्सा होंगे।

बदलते तकनीकी दौर को देखते हुए प्रधानाध्यापकों को नई तकनीकों, नवाचारों और आधुनिक विद्यालय प्रबंधन की जानकारी भी दी जाएगी। प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए पीपीटी, चार्ट, हैंडआउट और अन्य संसाधनों की पूर्व तैयारी, प्रशिक्षण स्थल का निरीक्षण और गतिविधियों की पहले से योजना बनाने पर भी जोर दिया गया है।

सक्षम माड्यूल प्रधानाध्यापकों की नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रशिक्षण के माध्यम से शैक्षणिक नेतृत्व, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावक-समुदाय से संवाद को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। शासन से प्रशिक्षण संबंधी दिशा-निर्देश मिलने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया गया है।

-अशोक कुमार, डायट प्रवक्ता