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रामपुर फर्जी मुठभेड़ मामला: IPS शगुन गौतम की बढ़ीं मुश्किलें, अब लखनऊ के इस बड़े अफसर को सौंपी गई जांच

Published: Sat, 18 Jul 2026 10:59 PM (GMT+05:30)

आईपीएस शगुन गौतम के खिलाफ रामपुर में फर्जी मुठभेड़ मामले की जांच दोबारा शुरू हो गई है। लखनऊ के आईजी ...और पढ़ें

आईपीएस शगुन गौतम

आईपीएस शगुन गौतम

HighLights

  1. शिकायतकर्ता की बेटी ने लखनऊ जाकर दर्ज कराए थे बयान

जागरण संवाददाता, रामपुर। आईपीएस शगुन गौतम एक बार फिर चर्चा में हैं। सीतापुर स्थित शस्त्र प्रशिक्षण केंद्र के कमांडेंट के रूप में कार्यरत आईपीएस शगुन गौतम के निजी कर्मी की मौत के मामले में मृतक के स्वजन ने उन पर कर्मचारी को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। इससे पहले रामुपर में तैनाती के दौरान भी उन पर भ्रष्टाचार से लेकर शराब माफिया से गठजोड़ और फर्जी मुठभेड़ के आरोप लगे थे। इनमें फर्जी मुठभेड़ के मामले में व्यापारी संजीव गुप्ता की शिकायत पर शासन ने दोबारा जांच बैठा दी है।

जांच महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन लखनऊ के आईजी सुभाष चंद्र दुबे को सौंपी गई है। आईजी ने जांच शुरू भी कर दी है। 13 जुलाई को आईजी ने बयान के लिए व्यापारी और उनकी बेटी यशिका गुप्ता को बताया था। व्यापारी ने बताया कि वह तबीयत खराब होने के कारण नहीं जा सके थे। बेटी ने लखनऊ जाकर बयान दर्ज करा दिए हैं।

छह अप्रैल 2021 को मिलक कोतवाली पुलिस ने खुलासा किया था कि उसने दो दिन पहले भैंसोड़ी गांव के पास शराब से भरा कैंटर पकड़ा था, जिसमें 32 लाख की शराब भरी थी। पुलिस ने व्यापारी संजीव गुप्ता समेत कई की गिरफ्तारी भी दिखाई थी। उन्हें जेल भेज दिया था। जेल से आने के बाद व्यापारी ने मुख्यमंत्री से शिकायत की।

उन्होंने प्रार्थना पत्र के साथ सभी साक्ष्य लगाते हुए आरोप लगाया कि यह सब एसपी शगुन गौतम के इशारे पर हुआ है। उनसे 10 लाख रुपये भी लिए गए हैं और फर्जी मुठभेड़ में भी बंद किया। शासन ने शिकायत पर डीआईजी मुरादाबाद को जांच सौंपी। डीआईजी की जांच में मुठभेड़ फर्जी पाई गई थी। अब इस मामले की जांच दोबारा की जा रही है।

भ्रष्टाचार का भी लगा था आरोप

मार्च 2020 से अगस्त 2021 तक शगुन गौतम रामपुर में बतौर एसपी तैनात रहे। उनकी तैनाती के दौरान कारोबारी संजीव गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई के अलावा भ्रष्टाचार के मामले में भी शिकायत हुई थी।

आरटीआई एक्टिविस्ट दानिश खां ने मुख्यमंत्री को टैग कर एक पोस्ट ट्वीट की थी, जिसमें आइपीएस शगुन गौतम पर एक गैंगरेप के मामले में अस्पताल संचालक से समझौते के नाम पर लाखों रुपये की डील होने का वीडियो प्रसारित किया गया था। यह डील तत्कालीन सीओ सिटी विद्या किशोर शर्मा के माध्यम से की गई थी।

शासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए तत्कालीन सीओ सिटी को निलंबित कर दिया था। इसके बाद दानिश खां की शिकायत पर एसपी और सीओ दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप में सेंट्रल विजिलेंस कमीशन ने मामला दर्ज किया था।

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