रामपुर डीएम की पहल: स्कूलों में स्वच्छता क्रांति और 700 लोगों को मिला रोजगार
रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने सरकारी विद्यालयों की बदहाल सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए एक विशेष अभियान चलाया।

HighLights
रामपुर डीएम ने स्कूलों की सफाई व्यवस्था में सुधार किया।
1529 परिषदीय विद्यालयों में स्वच्छता अभियान सफलतापूर्वक चला।
इस पहल से लगभग 700 लोगों को स्थानीय रोजगार मिला।
अनिल अवस्थी, रामपुर। ‘स्कूलों के शौचालय गंदे हों, कक्षाओं की छतों पर जाले हों और पंखों पर धूल की मोटी परत जमी हो तो बच्चों का मन पढ़ाई में कैसे लगेगा?’ रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के सर्वे में सरकारी विद्यालयों की गंदी तस्वीर सामने आई तो कुछ ऐसा ही सवाल जेहन में कौंधा। फिर, उन्होंने जिले में 1529 स्कूलों की इस समस्या का स्थानीय स्तर पर ऐसा समाधान निकाला, जिसने सफाई व्यवस्था तो बदली ही, करीब 700 लोगों को रोजगार भी मिला।
परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं और संसाधनों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जिलाधिकारी ने 20 से 22 अगस्त तक तीन दिवसीय विशेष अभियान चलाया था। इसके लिए 303 अधिकारियों की अलग-अलग टीम बनाकर पांच-पांच विद्यालयों में भेजा गया। इस दौरान 17 बिंदुओं पर सर्वे कराया गया।
शौचालयों का इस्तेमाल ही हो गया था बंद
सर्वे में कहीं जर्जर भवन मिले तो कहीं फर्नीचर की कमी सामने आई। इस बीच सभी विद्यालयों में एक समस्या समान मिली। वह थी, बदहाल सफाई व्यवस्था। सर्वे के दौरान पता चला कि सफाई के अभाव में कई विद्यालयों के शौचालयों का इस्तेमाल ही बंद हो गया था।
शिक्षकों ने बताया कि ग्राम पंचायत से नियुक्त सफाईकर्मी सप्ताह में एक-दो बार आता है। कई बार शौचालय की सफाई भी नहीं करता। नतीजतन शौचालयों में गंदगी और दुर्गंध के कारण छात्र-छात्राएं इनका उपयोग करने से बचने लगे।
डीएम ने समस्या का समाधान ग्राम पंचायत स्तर पर ही करने का निर्णय लिया। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी गुलाब चंद्र से सभी 680 ग्राम पंचायतों की निधि का ब्योरा मांगा। इसमें पर्याप्त बजट होने की पुष्टि हुई।
इस पर सभी ग्राम पंचायतों को विद्यालयों की सफाई के लिए पांच-पांच हजार रुपये मासिक मानदेय पर विशेष सफाईकर्मी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए। इन सफाईकर्मियों को शौचालय समेत स्कूल में सभी जगह नियमित सफाई का जिम्मा दिया गया। प्रत्येक सप्ताह कक्षाओं में लगे जाले और पंखों की भी सफाई करने की व्यवस्था सुनिश्चित हुई।
व्यवस्था की निगरानी के लिए विद्यालय के प्रधानाध्यापक को जिम्मेदारी दी गई, जिसकी रिपोर्ट ग्राम पंचायत के वाट्सएप ग्रुप में भेजी जाती है। इससे सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी हो रही है। इसका असर अब विद्यालयों में दिखाई देने लगा है। जिन शौचालयों में गंदगी के कारण बच्चे जाना पसंद नहीं करते थे, उनका नियमित उपयोग शुरू हो गया है।
स्कूल में प्रतिदिन सफाईकर्मी आने से गंदगी से निजात मिल गई है। इससे बच्चों का स्कूल आना नियमित हो रहा है।इससे शिक्षक स्टाफ का भी मन अब पठन-पाठन में लग रहा है।
-राकेश विश्वकर्मा, प्रभारी प्रधानाध्यापक, प्राइमरी स्कूल पट्टी कल्याणपुर
स्कूल के लिए नियमित सफाईकर्मी मिलने से स्कूल परिसर साफ रहता है। बच्चे शौचालय का भी प्रयोग कर पा रहे हैं। विद्यालय परिसर, कक्षाओं, पंखों और रसोईघर की सफाई में भी सुधार हुआ है। इस व्यवस्था से करीब 700 लोगों को गांव व आसपास ही प्रतिदिन लगभग दो घंटे काम के बदले रोजगार मिला है।
-पंकज, प्रधानाध्यापक, ऊधमपुर कंपोजिट विद्यालय, बिलासपुर
शिक्षा के मंदिर में स्कूल की सफाई आवश्यक है। इस पर प्रशासन सख्ता से कार्य कर रहे हा। नतीजे भी दिख रहे हैं। स्कूलों में सफाई की स्थिति सुधरी है। जहां संसाधनों में कमी मिली, उन्हें भी दूर कराया जा रहा है।
-अजय कुमार द्विवेदी, जिलाधिकारी, रामपुर
